दादा-पिता के पदचिह्नों पर चलीं तेनजिंग यांग्की, बनीं अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला IPS अधिकारी — देश सेवा में रचा नया इतिहास


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IPS तेनजिंग यांग्की का संबंध ऐसे परिवार से है, जिसकी जड़ें देश सेवा में गहराई तक जुड़ी हैं। वह अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मंत्री थुप्टेन टेम्पा की बेटी हैं, जो पहले आईआरएस और बाद में आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। तेनजिंग की मां भी प्रशासनिक क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और आंध्र प्रदेश सरकार में सचिव के पद पर कार्यरत रह चुकी हैं। इस तरह तेनजिंग ने अपने परिवार की सेवा-भावना और समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राज्य की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनकर एक नई मिसाल कायम की है।

दादा, पिता और अब पोती... देश सेवा की मिसाल है अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला IPS बनीं तेनजिंग यांग्की का परिवार

 

अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले की तेनजिन यांग्की ने इतिहास रचते हुए राज्य की पहली महिला भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है। उन्होंने हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA), हैदराबाद में 77वें बैच की पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया, जहां 36% महिला प्रतिनिधित्व के साथ यह बैच रिकॉर्ड बना गया। तेनजिन की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे अरुणाचल प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

 

IPS तेनजिन यांग्की की यूपीएससी रैंक

IPS तेनजिन यांग्की की यूपीएससी रैंक

तवांग जैसे सीमावर्ती और पहाड़ी इलाके से निकलकर उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 545वीं रैंक हासिल की, जो इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। तेनजिन की यह सफलता राज्य की युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। उन्होंने साबित किया है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर जुनून और लगन हो तो हर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। आज तेनजिन यांग्की अरुणाचल प्रदेश की बेटियों के लिए न सिर्फ एक रोल मॉडल हैं, बल्कि यह संदेश भी देती हैं कि देश सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए कोई सीमा नहीं होती।

क्रैक कर चुकी हैं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा

क्रैक कर चुकी हैं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा

तेनजिन यांग्की की यह सफलता किसी एक दिन की कहानी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और अटूट जज्बे का परिणाम है। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपने राज्य और परिवार का नाम रोशन किया हो। साल 2017 में तेनजिन ने अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) की परीक्षा पास कर अपने प्रतिभा और समर्पण का परिचय दिया था। उसी समय से उन्होंने ठान लिया था कि उनका अंतिम लक्ष्य यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करके देश की सेवा करना है।

तेनजिन ने इस सपने को साकार करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। कई बार असफलताओं और कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर पांच साल बाद न केवल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की, बल्कि राज्य की पहली महिला IPS अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया।

उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत विजय है, बल्कि यह उस सोच की जीत भी है जो यह साबित करती है कि छोटे से पहाड़ी राज्य की एक बेटी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। तेनजिन की कहानी अरुणाचल प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास सच्चे हों, तो सफलता निश्चित रूप से कदम चूमती है।

DU, JNU और इंग्लैंड से की है पढ़ाई

अरुणाचल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेनजिन यांग्की का शैक्षणिक सफर भी उतना ही प्रेरणादायक है जितनी उनकी सफलता की कहानी। उनका शुरुआती बचपन और स्कूली शिक्षा असम में बीती, जहां से उन्होंने अपने करियर की मजबूत नींव रखी। स्कूलिंग पूरी करने के बाद उन्होंने असम से ही ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से शिक्षकों और साथियों के बीच अलग पहचान बनाई।

उच्च शिक्षा के लिए तेनजिन दिल्ली आईं, जहां उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। जेएनयू में पढ़ाई के दौरान उन्होंने राजनीति और समाज से जुड़े मुद्दों की गहरी समझ विकसित की, जिसने उनके भीतर प्रशासनिक सेवा के प्रति जुनून को और भी मजबूत किया।

इसके बाद उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाते हुए इंग्लैंड के प्रसिद्ध वारविक विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र (Philosophy, Politics & Economics) में विज्ञान स्नातक की डिग्री प्राप्त की। विदेश में अध्ययन के अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया और उन्हें यह सिखाया कि कैसे वैश्विक विचारधारा को स्थानीय जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है।

तेनजिन यांग्की की यह शैक्षणिक यात्रा यह दर्शाती है कि समर्पण और अनुशासन के साथ किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। उनकी यह कहानी न सिर्फ अरुणाचल प्रदेश की बेटियों के लिए बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

परिवार से विरासत में मिली सेवा, त्याग और देश सेवा की प्रेरणा

परिवार से विरासत में मिली सेवा, त्याग और देश सेवा की प्रेरणा

 

 

सेवा, समर्पण और समाज के प्रति निस्वार्थ भाव तेनजिन यांग्की के व्यक्तित्व का मूल हिस्सा हैं — और यह गुण उन्हें विरासत में मिले हैं। उनके परिवार का इतिहास देश सेवा और बलिदान की मिसाल रहा है। तेनजिन यांग्की के दादा, न्येरपा खो, तवांग में पहले राजनीतिक सहायक (Political Assistant) के रूप में कार्यरत रहे और उन्होंने उस समय अहम भूमिका निभाई जब तवांग को भारतीय प्रशासनिक ढांचे में शामिल किया जा रहा था।

न्येरपा खो का योगदान इतना उल्लेखनीय था कि स्थानीय लोग आज भी उनका नाम मेजर बॉब खाथिंग — जो उस दौर के प्रसिद्ध भारतीय सैनिक, सिविल सेवक और राजनयिक थे — के साथ सम्मानपूर्वक लेते हैं। तवांग जैसे सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने में तेनजिन के दादा की भूमिका को इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में देखा जाता है।

यही देशप्रेम, जिम्मेदारी और सेवा की भावना तेनजिन यांग्की की रगों में बहती है। अपने दादा के पदचिह्नों पर चलते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि सेवा की भावना सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य होती है — और इसी विरासत ने उन्हें देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनने तक पहुंचाया।

पिता पूर्व IAS और मां रिटायर्ड सचिव

पिता पूर्व IAS और मां रिटायर्ड सचिव

तेनजिन यांग्की का सिविल सेवा में चयन सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पारिवारिक परंपरा का विस्तार है जिसमें देश सेवा एक विरासत की तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। वे अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की सिविल सेवा अधिकारी हैं। उनके पिता, दिवंगत थुप्टेन टेम्पा, 1989 बैच के आईएएस अधिकारी रहे, जिन्होंने राजनीति में आने से पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में भी योगदान दिया था। वहीं उनकी मां, जिग्मी चोडेन, 1992 बैच की अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) अधिकारी हैं और आंध्र प्रदेश सरकार में सचिव के पद पर सेवाएं दे चुकी हैं।

तेनजिन की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी सफलता उन सभी युवा बेटियों के सपनों की जीत है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करने का हौसला रखती हैं।

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