![]()
अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार, ट्रंप ने रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रतिबंध लगाए: क्या रोसनेफ्ट और लुकोइल को निशाना बनाना पुतिन के गणित को बदल पाएगा?

महीनों की ठप कूटनीति, रद्द हुए ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन और नागरिकों पर बढ़ते रूसी हमलों के बीच, अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पहली बार यूक्रेन से जुड़े नए प्रतिबंध लगाए हैं।
इन प्रतिबंधों का लक्ष्य रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियां, रोसनेफ्ट और लुकोइल, हैं। अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, इसका मकसद क्रेमलिन की युद्ध मशीनरी के लिए जरूरी वित्तीय स्रोतों को काटना है। इसके तहत इन कंपनियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां जब्त कर ली गई हैं और अमेरिकी नागरिकों तथा व्यवसायों को इनके साथ किसी भी तरह का व्यापार करने से रोक दिया गया है। साथ ही, कई सहायक कंपनियां भी इस प्रतिबंध के अंतर्गत आ गई हैं।
यह घोषणा रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों पर मिसाइल हमलों के एक घातक दौर के कुछ ही घंटों बाद की गई, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हुई। यह मॉस्को द्वारा चलाए जा रहे परमाणु सैन्य अभ्यास के साथ भी मेल खाती है, जिसमें ज़मीनी प्रणालियों, पनडुब्बियों और लंबी दूरी के बमवर्षकों से प्रक्षेपण शामिल थे।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा, “अब समय आ गया है कि हत्याएँ बंद हों और तुरंत युद्धविराम हो। राष्ट्रपति पुतिन के इस निरर्थक युद्ध को जारी रखने से इनकार के कारण, वित्त मंत्रालय रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, जो क्रेमलिन की युद्ध मशीन को वित्तपोषित करती हैं।”






