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“महर्षि वाग्भट, महर्षि चरक के शिष्य, ने आयुर्वेद में कुछ ऐसे प्राचीन तरीके बताए हैं जिन्हें अपनाकर आप सौ साल से ज्यादा स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। उनका कहना है कि उम्र बढ़ाने का कोई जादुई फार्मूला नहीं है, लेकिन नियमित आयुर्वेदिक उपाय अपनाने से जीवन लंबा और निरोगी बनाया जा सकता है।”
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भारत की जनसंख्या अब लगभग 140 करोड़ तक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार केवल 30 करोड़ लोग ही पूरी तरह स्वस्थ हैं। बाकी अधिकांश लोग शुगर, बीपी, हार्ट, पेट, जोड़ों के दर्द या वात-पित्त-कफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
आयुर्वेद एक्सपर्ट राजीव दीक्षित के मुताबिक, स्वस्थ जीवन के लिए हमें अपनी पुरानी आयुर्वेदिक परंपराओं की ओर लौटना होगा। महर्षि वाग्भट, महर्षि चरक के प्रमुख शिष्यों में से एक, ने हजारों साल पहले ऐसे उपाय बताए थे जिनसे लंबा और निरोगी जीवन संभव है। वाग्भट जी ने अपने जीवन के लगभग 135 साल पढ़ाई, शोध और प्रयोग में लगाए और स्वस्थ जीवन के रहस्यों को समझा।
महर्षि वाग्भट का कहना था कि हर व्यक्ति अपनी 85 प्रतिशत बीमारियों का इलाज सही जीवनशैली और आदतों से खुद कर सकता है, जबकि केवल 15 प्रतिशत बीमारियों में डॉक्टर की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने कुछ सरल और असरदार तरीके बताए, जिन्हें अपनाकर कोई भी सौ साल या उससे ज्यादा निरोगी जीवन जी सकता है।
पानी पीने के 3 सबसे जरूरी नियम
हम रोज पानी पीते हैं, लेकिन सही तरीके से पानी पीना भी उतना ही जरूरी है। पहला नियम यह है कि खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। दूसरा जरूरी नियम यह है कि पानी हमेशा घूंट-घूंट करके पीना चाहिए। पानी को जल्दी-जल्दी गटकना सेहत के लिए ठीक नहीं होता। तीसरा नियम यह है कि ठंडा पानी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। बहुत ठंडा पानी पेट की अग्नि को कमजोर कर देता है, जिससे खाना सही से नहीं पचता। हमेशा गुनगुना पानी पीना सबसे अच्छा माना गया है।
सुबह उठते ही पानी क्यों जरूरी है?
सुबह सोकर उठते ही बिना कुल्ला किए पानी पीना बहुत फायदेमंद माना गया है। रात भर मुंह में जो लार बनती है, उसमें औषधीय गुण होते हैं। यह लार शरीर को अंदर से साफ करने में मदद करती है और कई बीमारियों से बचाव करती है। सुबह यह पानी पीने से इम्युनिटी मजबूत होती है, पाचन सुधरता है और शरीर डिटॉक्स होता है।
खाना खाने का सही समय क्या है?
वाग्भट जी के अनुसार, शरीर में पाचन अग्नि यानी डाइजेस्टिव फायर सूर्य निकलने के ढाई घंटे बाद तक सबसे ज्यादा तेज होती है। उदाहरण के तौर पर, अगर सूरज 7 बजे उगता है, तो 7:00 से 9:30 बजे तक शरीर की पाचन शक्ति सबसे मजबूत रहती है। इस समय किया गया भोजन सबसे अच्छे तरीके से पचता है और शरीर को पूरा पोषण मिलता है। इसलिए उन्होंने कहा कि सुबह सबसे ज्यादा खाना खाना चाहिए, दोपहर में थोड़ा कम और रात को सबसे हल्का भोजन करना चाहिए।
मनपसंद भोजन कब खाएं?
अगर आपको पराठा, मिठाई, रबड़ी, रसगुल्ला या कोई भी भारी चीज बहुत पसंद है, तो उसे सुबह के समय ही खाना चाहिए। सुबह पाचन अग्नि इतनी मजबूत होती है कि भारी से भारी भोजन भी आसानी से पच जाता है। लेकिन यही चीज अगर रात में खाई जाए, तो वह चर्बी, गैस और बीमारी का कारण बन जाती है।
भोजन केवल पेट भरना नहीं, मन को भी तृप्त करना चाहिए
वाग्भट जी कहते हैं कि भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि के लिए भी जरूरी होता है। जब मन संतुष्ट रहता है, तो शरीर में हार्मोन और एंजाइम सही मात्रा में बनते हैं। इससे डिप्रेशन नहीं होता, मानसिक रोग नहीं होते और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।






