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अमीनुल हक पोलाश उन बांग्लादेशी अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें पिछले साल 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद देश छोड़ना पड़ा।”
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बांग्लादेश के पूर्व इंटेलिजेंस ऑफिसर और डिप्लोमैट अमीनुल हक पोलाश ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पोलाश का कहना है कि यूनुस का दुनिया को दिखाया जाने वाला भोला-भाला चेहरा असल में पूरी तरह अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस ने माइक्रो-क्रेडिट के आविष्कार का श्रेय खुद ले लिया और असली शोधकर्ताओं के नाम हटा दिए।
पोलाश के अनुसार, यूनुस ने ग्रामीण बैंक और संबंधित संस्थाओं के नाम पर अरबों रुपए की वित्तीय हेरफेरी की और गरीबी उन्मूलन के नाम पर एक व्यापक कॉर्पोरेट नेटवर्क तैयार किया। उन्होंने अपनी निजी संपत्ति को ट्रस्टों में ट्रांसफर किया और इसे कर्ज के रूप में दर्ज कराया, ताकि कराधान से बचा जा सके। इसके अलावा, यूनुस के शासन में परिवारवाद और वफादारों को उच्च पदों पर नियुक्त करना आम बात थी।
पोलाश ने बताया कि शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा, क्योंकि यूनुस के शासन में उनके खिलाफ ‘गायब कर दो’ जैसे शब्द इस्तेमाल हो रहे थे। निर्वासन उनके लिए बचाव का विकल्प था। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त 2024 में यूनुस की अंतरिम सरकार ने उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार मामलों को बंद करवा दिया।
पोलाश का दावा है कि पश्चिमी दुनिया यूनुस को नायक और संत के रूप में देख रही है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। पोलाश ने कहा कि सारी सच्चाई और दस्तावेज मौजूद हैं और एक दिन दुनिया को इसका वास्तविक चेहरा देखने को मिलेगा।
इस खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि यूनुस के पीछे छिपे पावर स्ट्रक्चर, वित्तीय हेरफेर और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने उन्हें सिर्फ एक नायक नहीं बल्कि विवादास्पद और ताकतवर व्यक्तित्व बना दिया है।






