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मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर पर भगवा ध्वज फहराया। इस अवसर ने पूरे देश में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का माहौल बना दिया। वहीं, पाकिस्तान ने इस कार्यक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया जताई है। वहां की मीडिया और अधिकारियों ने इसे भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभाव और इस्लामोफोबिया का संकेत बताया। पाकिस्तान के बयान ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक नजदीकियों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह विवाद धार्मिक भावनाओं और अंतरराष्ट्रीय बयानबाज़ी दोनों के लिहाज से काफी ध्यान आकर्षित कर रहा है।

इस्लामाबाद: अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में धर्मध्वज फहराए जाने से पाकिस्तान की प्रतिक्रिया तीखी रही। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को भारत में इस्लामोफोबिया के बढ़ने और मुस्लिम अल्पसंख्यकों को हाशिए पर डालने की कोशिश के रूप में देखा। बयान में कहा गया कि यह कदम भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर दबाव और हिंदुत्व सोच के बढ़ते असर का संकेत देता है, और मुस्लिम सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जानबूझकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
पाकिस्तान ने यह भी कहा कि कई ऐतिहासिक मस्जिदें अब बेअदबी या गिराए जाने के खतरों का सामना कर रही हैं, जबकि भारतीय मुसलमान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से लगातार दबाव में हैं। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया, नफरत से प्रेरित हमलों और हेट स्पीच पर ध्यान दे। गौरतलब है कि राम मंदिर का निर्माण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ है, जिसमें विवादित भूमि हिंदू पक्ष को सौंपे जाने का फैसला दिया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा कीं, जिससे मंदिर पर धर्मध्वज फहराने की घटना का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित हुआ।






