ई-कॉमर्स में हिडन चार्जेस का खेल जारी, कंपनियां कैसे ले रही हैं एक्स्ट्रा पैसे


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देश में ई-कॉमर्स तेजी से फैल रहा है और ऑनलाइन शॉपिंग अब आम जीवन का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन इसके साथ ही ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। हाल ही में कई ई-कॉमर्स कंपनियों ने दावा किया था कि उन्होंने डार्क पैटर्न हटा दिए हैं और खरीदारी को पारदर्शी बनाया है। बावजूद इसके, हाल के एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि कई कंपनियां अब भी ड्रिप प्राइसिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे ग्राहक अक्सर सोच से ज्यादा भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति ऑनलाइन खरीदारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि सही जानकारी के बिना छुपे हुए चार्ज और प्राइस ट्रिक्स उनकी जेब पर असर डाल रही हैं।

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नई दिल्ली: हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि देश की कई बड़ी ई-कॉमर्स और डिजिटल सर्विस कंपनियां अभी भी ग्राहकों से छुपे हुए चार्ज और कीमतों के खेल का इस्तेमाल कर रही हैं। LocalCircles द्वारा किए गए सर्वे के अनुसार फ्लिपकार्ट, Myntra, MakeMyTrip, क्लियरट्रिप, बिगबास्केट, Axelia, Netmeds, टाटा 1mg, जोमैटो, ब्लिंकिट और Ixigo जैसी बड़ी कंपनियों ने दावा किया था कि उन्होंने डार्क पैटर्न हटा दिए हैं। लेकिन जांच में पाया गया कि ये अब भी ड्रिप प्राइसिंग (शुरुआत में कम कीमत दिखाकर बाद में एक्स्ट्रा चार्ज जोड़ना) का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सर्वे में यह भी सामने आया कि जिन 26 प्लेटफॉर्म्स ने सरकार को लिखित में कहा था कि वे ‘डार्क पैटर्न फ्री’ हैं, उनमें से 21 पर अभी भी ग्राहकों को फंसाने का तरीका मौजूद है। यह सर्वे 392 जिलों के 2.5 लाख से अधिक लोगों की राय और AI रिसर्च पर आधारित है, जिसमें 300 से ज्यादा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की पड़ताल की गई।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि कुछ क्षेत्रों में गड़बड़ी ज्यादा है। डिजिटल लेंडिंग, एडटेक, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स, ओटीटी, ऐप टैक्सी, फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स, सॉफ्टवेयर एप्स, दवा और हेल्थ सर्विसेज, ट्रैवल टिकट, मूवी/इवेंट टिकट, ऑनलाइन पेमेंट, ऑनलाइन गेमिंग, रियल एस्टेट, इंश्योरेंस, विदेशी मुद्रा, ब्रॉडबैंड और नौकरी खोजने वाली साइट्स में 7 या उससे अधिक तरह की छुपी हुई गड़बड़ी पाई गई।

वहीं कुछ क्षेत्रों में गड़बड़ी कम (4-6 प्रकार) पाई गई, जैसे ट्रेन टिकट बुकिंग, मोबाइल टेलीकॉम, वॉयस असिस्टेंट, डाइनिंग सर्विस, सरकारी सेवाएं, होम हेल्थ सर्विस, इलेक्ट्रिक स्कूटर, ऑनलाइन ट्रेडिंग, पुरानी कारों की बिक्री, पैथोलॉजी लैब, क्रिप्टोकरेंसी, डेटिंग/मैट्रिमोनियल एप्स और ऑनलाइन जूलरी।

सर्वे यह स्पष्ट करता है कि भले ही कंपनियों ने नियमों का पालन करने का दावा किया हो, ग्राहकों को अभी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर छुपे हुए चार्ज और प्राइसिंग ट्रिक्स से सतर्क रहने की जरूरत है।

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