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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान में कुछ देशों पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने के आरोप लगाए गए थे, जिनमें उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम लिया। ट्रंप की टिप्पणी के बाद भारत ने भी पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। इस बयानबाज़ी से पाकिस्तान तिलमिला उठा और भारत के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ देशों पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने के आरोप लगाने और उसमें पाकिस्तान का नाम लेने के बाद इस्लामाबाद आलोचना के घेरे में आ गया। भारत ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए। इसी को लेकर पाकिस्तान अब भारत पर भड़का हुआ है।
अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने दावा किया कि भारत ट्रंप के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने आखिरी परमाणु परीक्षण 1998 में किया था और उसकी नीति हमेशा स्पष्ट रही है। अंद्राबी ने गुप्त या अवैध परमाणु गतिविधियों के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों का समर्थन दोहराया जिनमें परमाणु परीक्षणों पर रोक की बात कही गई है।
दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया विस्फोट पर पूछे गए सवाल पर भी पाकिस्तान ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उसे नहीं पता कि हमले में शामिल लोग कौन हैं। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस घटना में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की आशंका जताई है, लेकिन पाकिस्तान इस संबंध में किसी भी भूमिका से इनकार कर रहा है।






