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सहारा ग्रुप लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रहा है। कई संपत्तियाँ बिकने की कगार पर हैं और कर्मचारियों को महीनों—कई मामलों में वर्षों—से वेतन नहीं मिला है। अब वेतन भुगतान से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में फैसला करेगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा ग्रुप के कर्मचारियों द्वारा लंबित वेतन की मांग को लेकर दायर अंतरिम याचिकाओं को 17 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। कई कर्मचारियों ने अदालत को बताया कि उन्हें महीनों नहीं, बल्कि वर्षों से वेतन नहीं मिला है। इसके साथ ही अदालत उसी दिन सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL) की उस प्रमुख याचिका पर भी सुनवाई करेगी, जिसमें ग्रुप ने अडानी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को अपनी 88 महत्वपूर्ण संपत्तियां बेचने की अनुमति मांगी है ताकि बकाया दायित्वों का निपटारा किया जा सके। न्यायालय ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, सेबी और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल के आग्रह पर वित्त और सहकारिता मंत्रालयों को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने न्यायमित्र को सभी 88 प्रस्तावित संपत्तियों का पूरा ब्यौरा इकट्ठा करने, उनकी कानूनी स्थिति की जांच करने और यह देखने के लिए कहा है कि संपत्तियां विवादित हैं या नहीं। इसके अलावा, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यह तय करेगी कि इन संपत्तियों को एक साथ बेचा जाए या चरणबद्ध तरीके से।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सहारा ग्रुप कर्मचारियों द्वारा किए गए वेतन दावों की विस्तृत जांच करे और न्यायमित्र इन दावों की वास्तविकता पर रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं और हस्तक्षेप आवेदनों पर संयुक्त रूप से सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है, जहां यह मामला और आगे बढ़ेगा।






