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Buxar Voting Percentage 2025 Live: बक्सर सीट पर इस बार मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। कांग्रेस अपने परंपरागत गढ़ को बचाने में जुटी है, जबकि बीजेपी के उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा यहां कांग्रेस की पकड़ तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। मतदाता शांतिपूर्वक मतदान कर रहे हैं और शुरुआती रुझान दिलचस्प संकेत दे रहे हैं।
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Buxar Voting Percentage 2025 Live: बिहार की राजनीति में बक्सर विधानसभा सीट हमेशा से एक खास महत्व रखती है। यह सीट न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां का राजनीतिक समीकरण भी हर बार कुछ नया मोड़ लेता है। इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव में बक्सर का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस जहां अपने दशकों पुराने गढ़ को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी के उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा इस गढ़ को भेदने के लिए मैदान में डटे हुए हैं।
बक्सर विधानसभा क्षेत्र की स्थापना साल 1951 में हुई थी और तब से अब तक यहां 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इस लंबे राजनीतिक सफर में कांग्रेस ने 10 बार जीत दर्ज की है, जिससे यह सीट उसका पारंपरिक गढ़ मानी जाती है। कांग्रेस ने 2015 और 2020 दोनों चुनावों में भी इस सीट को अपने पास बनाए रखा था। वहीं, बीजेपी को अब तक तीन बार सफलता मिली है। इसके अलावा, 1990 और 1995 में सीपीएम ने यहां लगातार दो बार जीत हासिल की थी। 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और 2005 में बसपा ने भी इस सीट पर अपना झंडा बुलंद किया था।
पिछले चुनाव यानी 2020 में कांग्रेस उम्मीदवार संजय तिवारी ने बीजेपी के परशुराम चौबे को हराया था। जातीय समीकरण की बात करें तो इस क्षेत्र में यादव और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जिनकी संख्या इतनी है कि वे चुनावी नतीजों की दिशा तय करने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल — कांग्रेस और बीजेपी — इन समुदायों को साधने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
बक्सर का इतिहास भी राजनीति जितना ही गौरवशाली रहा है। यह वही धरती है जहां 1764 में प्रसिद्ध बक्सर की लड़ाई लड़ी गई थी, जिसने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव को मजबूत किया। यह लड़ाई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगल साम्राज्य, अवध के नवाब तथा बंगाल के शासक की संयुक्त सेना के बीच हुई थी। इसके अलावा, चौसा गांव भी ऐतिहासिक दृष्टि से प्रसिद्ध है, जहां 1539 में शेर शाह सूरी और मुगल सम्राट हुमायूं के बीच निर्णायक युद्ध हुआ था।
बक्सर सिर्फ राजनीति और इतिहास से ही नहीं, बल्कि कला और संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है। यह शहनाई के महान उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की जन्मभूमि है। इसके साथ ही, भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हरिहर सिंह का भी जन्म यहीं हुआ था। चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का भी संबंध बक्सर से ही है, जिनकी ‘जन सुराज पार्टी’ पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रही है।
2025 के चुनाव में बक्सर की यह ऐतिहासिक भूमि एक बार फिर सुर्खियों में है। मतदाता शांतिपूर्वक अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं और शुरुआती रुझान इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि इस बार मुकाबला काफी कांटे का होगा। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस एक बार फिर अपने गढ़ को बचा पाएगी या बीजेपी अपनी नई रणनीति और उम्मीदवार के दम पर इतिहास बदलने में कामयाब होगी।






