![]()
आज का दिन यानी 3 नवंबर 2025, सोमवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और इस दिन सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है — एक बार कृष्ण पक्ष और एक बार शुक्ल पक्ष में। जब यह व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, और इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

🔹 पंचांग और तिथि विवरण:
आज की तिथि त्रयोदशी है, जो अर्धरात्रोत्तर 02 बजकर 06 मिनट तक रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि का आरंभ होगा। आज का नक्षत्र उत्तराभाद्रपद दोपहर 03 बजकर 06 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग की बात करें तो हर्षण योग शाम 07 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वज्र योग प्रारंभ होगा। आज का करण कौलव अपराह्न 03 बजकर 41 मिनट तक रहेगा और फिर तैतिल करण आरंभ होगा।
🔹 ग्रह-नक्षत्र और चंद्र स्थिति:
चंद्रमा आज पूरे दिन और रात मीन राशि में गोचर करेगा। यह स्थिति मानसिक शांति, करुणा और आत्मिक बल को बढ़ाने वाली मानी जाती है। सूर्य वर्तमान में तुला राशि में विराजमान हैं, जिससे व्यापार और सामाजिक जीवन में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
🔹 सूर्योदय-सूर्यास्त और शुभ मुहूर्त:
आज सूर्योदय सुबह 6:33 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 5:35 बजे तक रहेगा।
-
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:43 बजे तक
-
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:38 बजे तक
-
गोधूलि बेला: शाम 5:34 से 6:00 बजे तक
-
निशीथ काल: रात 11:39 से 12:31 बजे तक रहेगा।
🔹 अशुभ मुहूर्त और राहुकाल:
आज राहुकाल सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक रहेगा, इस समय किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए।
गुलिक काल दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक,
यमगंड काल सुबह 10:30 से 12:00 बजे तक रहेगा।
वहीं, अमृत काल सुबह 6:34 से 7:57 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ समय माना गया है।
दुर्मुहूर्त काल दोपहर 12:26 से 1:10 बजे तक रहेगा।
🔹 व्रत और पूजा का महत्व:
आज के दिन सोम प्रदोष व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान करके भगवान शिव की आराधना करते हैं और संध्या काल में शिवलिंग पर जल, दूध, शहद और बेलपत्र चढ़ाते हैं। शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है। प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
🔹 धार्मिक और पौराणिक मान्यता:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया था, तब उसमें से निकले विष को भगवान महादेव ने अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीलवर्ण हो गया और उन्हें नीलकंठ कहा गया। माना जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव इसी रूप में पूजित होते हैं। इसलिए सोम प्रदोष व्रत रखने वाले भक्तों को भगवान शिव की कृपा से विष समान जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है।
🔹 आज का निष्कर्ष:
आज का दिन आत्मिक शुद्धि, आराधना और शिव कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ है। जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से आज सोम प्रदोष व्रत रखेंगे और भगवान शिव की आराधना करेंगे, उनके जीवन से दुख और दरिद्रता का अंत होगा, और घर-परिवार में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति का वास होगा।






