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Success Story: पंकज मिश्रा ने 35 करोड़ के बिज़नेस से शुरू किया सफर, अब 400 करोड़ के टारगेट पर नज़र
नई दिल्ली: पंकज मिश्रा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। गोरखपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर उन्होंने दिल्ली की भीड़भाड़ में अपने सपनों को पंख दिए। एक साधारण परिवार में जन्मे पंकज ने बचपन में ही महसूस किया कि अगर जिंदगी में कुछ बड़ा करना है, तो सीमाओं से बाहर निकलना पड़ेगा। पढ़ाई के दिनों में जब वह अपने सहपाठियों से पीछे छूटने लगे, तो उन्होंने ठान लिया कि अब हर चुनौती का हल खुद बनेंगे। यही सोच उन्हें एक ‘प्रॉब्लम सॉल्वर’ बना गई।
उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद M.Tech में गोल्ड मेडल हासिल किया, लेकिन नौकरी की सुरक्षित राह चुनने के बजाय उन्होंने उद्यमिता का रास्ता अपनाया। शुरुआत में हालात आसान नहीं थे — सीमित संसाधन, अनुभव की कमी और प्रतिस्पर्धा की भरमार थी। मगर पंकज ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कदम रखते हुए कुछ ही वर्षों में 35 करोड़ रुपये का सफल बिजनेस खड़ा कर दिया।
लेकिन उनके सपने यहीं खत्म नहीं हुए। पंकज ने अब बेकरी उद्योग में उतरकर एक नया अध्याय शुरू किया है। उनकी नई कंपनी का लक्ष्य अगले तीन सालों में 400 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना है। वह मानते हैं कि भारत का फूड एंड बेकरी मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और अगर इनोवेशन व क्वालिटी पर ध्यान दिया जाए, तो सफलता तय है।
पंकज मिश्रा की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों में बड़े सपने देखने से डरते हैं। गोरखपुर के छोटे से कमरे में शुरू हुआ उनका सफर आज करोड़ों के बिजनेस में तब्दील हो चुका है — यह बताने के लिए कि जुनून, मेहनत और विज़न के साथ कुछ भी असंभव नहीं।
अभावों में बीता बचपन
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पंकज मिश्रा की जीवन कहानी संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल है। उनका सफर 1995 में तब शुरू हुआ, जब वह अपने परिवार के साथ गोरखपुर से दिल्ली आए। उस समय उनका परिवार निर्माणाधीन इमारत के एक छोटे से कमरे में रहता था। सीमित साधनों और अभावों में पले-बढ़े पंकज के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने पहली बार पांचवीं क्लास में चॉकलेट खाई थी — यह बात बताती है कि उनका बचपन कितनी सादगी और संघर्षों से भरा था।
स्कूल के दिनों में अक्सर पीछे रहने की भावना ने उन्हें भीतर से झकझोरा। लेकिन यही कमी बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई। जब वह केआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंचे, तो पहले साल की असफलता ने उन्हें तोड़ने के बजाय मजबूत बना दिया। मां की सलाह पर उन्होंने ‘प्रोसेस-फिक्सिंग’ का तरीका अपनाया — यानी मेहनत तो करनी है, लेकिन सही तरीके से।
उन्होंने आखिरी बेंच छोड़कर आगे बैठना शुरू किया, क्लास में सक्रियता बढ़ाई और हर विषय को गहराई से समझने का निश्चय किया। नतीजा यह हुआ कि उनके ग्रेड्स में जबरदस्त सुधार हुआ और उन्होंने M.Tech में गोल्ड मेडल हासिल किया।
पंकज कहते हैं कि इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि “सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही प्रक्रिया से हासिल होती है।” यही सोच आगे चलकर उनके बिजनेस सफर की नींव बनी। गोरखपुर के छोटे कमरे से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज करोड़ों के साम्राज्य तक पहुंच चुकी है — एक ऐसी कहानी जो हर उस युवा को प्रेरित करती है, जो असफलता से डरने की बजाय उसे सीख में बदलना चाहता है
अपनी पहचान बनाने की ठानी
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M.Tech में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद पंकज मिश्रा ने अपनी तकनीकी समझ और विश्लेषणात्मक सोच को वास्तविक दुनिया में आजमाया। उन्होंने करियर की शुरुआत लावा इंटरनेशनल और डेल्हिवरी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों से की, जहां उन्हें बिजनेस स्ट्रक्चर, ऑपरेशंस और सप्लाई चेन मैनेजमेंट की गहरी समझ मिली। लेकिन भीतर ही भीतर वह जानते थे कि नौकरी उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है — उन्हें खुद का कुछ बड़ा बनाना है।
इसी सोच के साथ उन्होंने 2019 में अपनी पत्नी और रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे पिता के सहयोग से पीएनडी ग्लोबल लॉजिस्टिक्स की सह-स्थापना की। शुरुआत बहुत छोटी थी — महज़ 51 लाख रुपये के टर्नओवर से। लेकिन पंकज की स्पष्ट दृष्टि, प्रोसेस-ड्रिवन एप्रोच और टीम बिल्डिंग की क्षमता ने इस कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
कुछ ही सालों में पीएनडी ग्लोबल का टर्नओवर 35 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया और इसकी ब्रांचेज देश से लेकर विदेश तक फैल गईं। लॉजिस्टिक्स की यह सफलता सिर्फ आर्थिक नहीं थी, बल्कि यह पंकज के विजन और अनुशासन का प्रमाण थी।
हालांकि, इस उपलब्धि के बाद भी पंकज मिश्रा का सफर यहीं नहीं रुका। वे अब एक ऐसे कंज्यूमर ब्रांड पर काम कर रहे हैं जो हर आम भारतीय के जीवन से जुड़ा हो — ऐसा उत्पाद जो लोगों के रोजमर्रा के अनुभवों को बेहतर बना सके और जिसमें उनकी ऑपरेशनल स्किल्स का सीधा उपयोग हो।
यह सफर बताता है कि सही मानसिकता, परिवार का सहयोग और अनुशासित दृष्टिकोण से एक साधारण व्यक्ति भी करोड़ों का बिजनेस साम्राज्य खड़ा कर सकता है।
बेकरी बिजनेस में एंट्री
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लॉजिस्टिक्स बिजनेस में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने के बाद पंकज मिश्रा ने दिसंबर 2024 में एक नए सपने की नींव रखी — “बेकईट्स (Bakeats)”। इस ब्रांड के पीछे उनका विचार बेहद साफ था — प्रीमियम क्वालिटी को आम आदमी की पहुंच में लाना।
जहां आम तौर पर प्रीमियम बेकरी ब्रांड्स सिर्फ हाई-एंड मार्केट को टारगेट करते हैं, वहीं पंकज ने Bakeats को हर घर तक पहुंचाने का विज़न रखा। उन्होंने अपने उत्पादों को न सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि आकर्षक नामों से लॉन्च किया, ताकि यह युवा और पारिवारिक दोनों तरह के ग्राहकों को जोड़ सके।
बेकरी इंडस्ट्री की गहराई को समझने के लिए उन्होंने एफएमसीजी सेक्टर के दिग्गज और ‘भीष्म पितामह’ कहे जाने वाले डॉ. गिरीश गुप्ता से मार्गदर्शन लिया। उनके अनुभव और इनसाइट्स ने पंकज को यह समझने में मदद की कि भारत के बदलते उपभोक्ता अब स्वाद के साथ हेल्थ और वैल्यू दोनों चाहते हैं।
Bakeats की सबसे बड़ी ताकत उसकी पहुंच है। ब्रांड सिर्फ ₹10 के पैकेट में भी प्रीमियम पैकेजिंग और बेहतरीन स्वाद की गारंटी देता है — यानी, क्वालिटी से कोई समझौता नहीं। आगे कंपनी रागी और ज्वार-आधारित शुगर-फ्री, हेल्दी स्नैक्स की नई रेंज लॉन्च करने जा रही है, जिससे हेल्थ-कॉन्शियस ग्राहकों तक इसकी पकड़ और मजबूत होगी।
पंकज मिश्रा का लक्ष्य अब सिर्फ एक ब्रांड बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा भारतीय प्रीमियम बेकरी इकोसिस्टम तैयार करना है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा कर सके। उनका विज़न है कि आने वाले तीन वर्षों में Bakeats 400 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का आंकड़ा छू ले।
यह कहानी बताती है कि कैसे एक इंजीनियर जिसने कभी पांचवी कक्षा में पहली बार चॉकलेट खाई थी, अब करोड़ों भारतीयों के स्वाद को नई पहचान देने जा रहा है।
400 करोड़ का बड़ा टारगेट
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पंकज मिश्रा ने अपने ब्रांड Bakeats को सिर्फ एक बेकरी कंपनी नहीं, बल्कि ‘मेड इन इंडिया क्वालिटी रिवोल्यूशन’ के रूप में खड़ा करने का संकल्प लिया। उन्होंने यह तय किया कि प्रोडक्शन की शुरुआत से लेकर पैकेजिंग तक हर प्रक्रिया भारत में ही होगी। यही कारण है कि उन्होंने कई स्थापित ब्रांडों की तरह थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरिंग का सहारा नहीं लिया, बल्कि 100% मेड इन इंडिया मशीनरी के साथ खुद की फैक्ट्री स्थापित की।
उनका विश्वास था कि “जब उत्पाद अपनी जड़ों से बनेगा, तो भरोसा और स्वाद दोनों ही असली होंगे।” यही सोच Bakeats की आत्मा बन गई।
कंपनी का लक्ष्य अगले 6 महीनों में ब्रेक-ईवन पॉइंट पर पहुंचने का है, जबकि पूर्ण क्षमता पर हर महीने 5 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व (Monthly Revenue) हासिल करने की योजना है। पंकज का बड़ा सपना है — अगले तीन वर्षों में 400 करोड़ रुपये का रेवेन्यू टारगेट पूरा करना।
इस दिशा में कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है। फिलहाल पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में मजबूत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। जल्द ही Bakeats के उत्पाद Blinkit और Zepto जैसे क्यू-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध होंगे, जिससे ग्राहकों को कुछ ही मिनटों में “फ्रेश प्रीमियम स्नैक्स” अपने घर पर मिल सकेंगे।
पंकज मिश्रा की यह कहानी बताती है कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि जुनून, दृष्टि और लगातार सीखने की मानसिकता की ज़रूरत होती है। एक छोटे कमरे में देखे गए उनके सपने ने आज भारतीय एफएमसीजी सेक्टर में एक नई ऊर्जा और दिशा पैदा कर दी है।






