जिला अस्पताल में 145 सीसीटीवी कैमरे बंद, चोरी की वारदातों का नहीं हो पाता खुलासा, विभागों में घूम रहे शुरू करवाने के पत्र


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राजमेस ने लगवाए थे कैमरे: अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार 2023 में राजमेस की ओर से कैमरों का इंस्टालेशन करवाया गया था। इसका निर्णय राज्य स्तर से हुआ। अधिकारियों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज से अटैच हॉस्पिटल्स में निगरानी के लिए श्रीगंगानगर के अलावा बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, सीकर, भीलवाड़ा, सिरोही, चित्तौड़गढ़, धौलपुर सहित 12 जिलों में कैमरे लगवाए गए थे।

श्रीगंगानगर के अस्पताल में लगे कैमरे शुरू नहीं हुए तो राजमेस को पत्र लिखे गए। इसके बाद विभागीय वीसी में मामला उठा तो कार्रवाई हुई। वर्ष 2025 में एक बार कैमरे शुरू हुए लेकिन दो-तीन महीने में ही फिर से बंद हो गए। चोरी की कई वारदातें हुई: राजकीय जिला अस्पताल में चोरी की कई वारदातें हुई हैं। पिछले पांच महीने में अस्पताल परिसर से बाइक चोरी की करीब आधा दर्जन वारदातें हुई। इसके अलावा 2 सितंबर की रात को बंद पड़े आक्सीजन प्लांट से कंप्रेशर, मोटर, पाइपें व अन्य सामान चोरी हुआ।

पुलिस को अंदेशा है कि चोर धीरे-धीरे सामान चोरी कर ले जाते रहे। हेड कांस्टेबल झाबरमल ने बताया कि आक्सीजन प्लांट का सामान खोलने के औजार घटनास्थल पर ही पड़े मिले थे। कैमरे चल रहे होते तो चोरों की मूवमेंट का पता लग सकता था और महंगी मोटर व कंप्रेशर आदि चोरी होने से बच जाते। अस्पताल परिसर में घूमने वाले नशे के आदी लोग लॉक नहीं लगा होने पर बाइक आदि ले जाते हैं। इन्हें फुटेज की मदद से पकड़ा जा सकता है। कैमरे चालू हालत में हों तो अस्पताल में होने वाली अन्य छोटी-मोटी चोरियों पर भी रोक लग सकती है। भास्कर संवाददाता| श्रीगंगानगर राजकीय जिला अस्पताल में 2023 में लगाए गए 145 कैमरे दो साल में महज दो-तीन महीने ही चलने के बाद अब बंद पड़े हैं। इसे लेकर शिकायतों के विभागीय पत्र राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस), डीओआईटी और अस्पताल प्रशासन के बीच घूम रहे हैं। इस बीच अस्पताल में चोरी की वारदातें भी होती रहीं लेकिन फुटेज नहीं होने के कारण आरोपियों की पहचान तक नहीं हुई। खास बात यह है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से ओपीडी, इमरजेंसी व अन्य आवश्यक जगहों पर लगाए गए 45 कैमरे काम कर रहे हैं।

चोरी व अप्रिय वारदात रोकने के लिए अस्पताल में खुली जगहों पर लगे 145 कैमरे बंद हैं। इन कैमरों के विजुअल्स की क्वालिटी भी बेहतर बताई जाती है लेकिन बंद होने के कारण किसी काम के नहीं रहे। उधर, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कैमरों की इंस्टालेशन करने वाली कंपनी सर्विस नहीं दे रही है। इनके रखरखाव का काम किसी दूसरी कंपनी को सौंपा जा सकता है। निर्णय राज्य स्तर से होगा। क्या कहते हैं अधिकारी: पीएमओ पद ज्वाइन करने से पहले 2023 में कैमरे लगे थे। इनके बंद होने का मैटर मीटिंग्स में उठाया। चार बार राजमेस व अन्य विभागों को लेटर लिखे।

बाद में दो-तीन महीने के लिए कैमरे शुरू हुए लेकिन फिर वापस बंद हो गए। आक्सीजन प्लांट में हुई चोरी से पहले अगस्त में भी पत्र लिखा गया था। अस्पताल प्रशासन की ओर से 45 कैमरे ओपीडी, इमरजेंसी व अन्य जगहों पर लगाए गए हैं। इनमें से अधिकांश काम कर रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड में लगे कैमरों की फुटेज मोबाइल से भी देख सकता हूं। यहां 24 घंटे नजर रहती है। -डॉ. दीपक मोंगा, पीएमओ अस्पताल में लगे कैमरों का निर्णय राज्यस्तर से हुआ था। कैमरे टीसीआईएल कंपनी द्वारा लगाए गए थे। हमारी जानकारी के मुताबिक कंपनी सर्विस नहीं दे रही है। इसकी सूचना उच्च स्तर पर भिजवाई है। संभव है किसी अन्य कंपनी से कांट्रेक्ट हो। निर्णय राज्य स्तर से ही होगा। -भावना बिश्नोई, एसीपी, डीओआईटी

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