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उत्तर प्रदेश PCS (UPPCS) की सफलता की कहानी में उम्र कोई बाधा नहीं, बल्कि हौसला बड़ा होना जरूरी है। 3 बच्चों की मां दीपा ने परिवार और घर की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। लगातार मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने 40 की उम्र में PCS परीक्षा पास की और अफसर बनीं। उनकी कहानी साबित करती है कि जुनून और दृढ़ संकल्प किसी भी चुनौती को मात दे सकते हैं। तानों और मुश्किलों के बावजूद उनका सफर प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
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दीपा भाटी की प्रेरणादायक सफलता की विस्तृत कहानी:
दीपा भाटी की कहानी यह साबित करती है कि उम्र और जिम्मेदारियां कभी भी आपके सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि आपके पास जुनून और हौसला हो। उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली दीपा एक छोटे से गांव कोंडली बांगर के सामान्य परिवार से आती हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय (KV) से पूरी की और आगे की शिक्षा में केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन और इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
कम उम्र में शादी और 3 बच्चों की जिम्मेदारियां उनके सामने बड़ी चुनौती थीं। शादी के बाद, घर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनकी पढ़ाई कई बार बाधित हुई। लेकिन दीपा के मन में हमेशा कुछ बड़ा करने की इच्छा और अपने सपनों को पूरा करने का जुनून बना रहा। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हर मुश्किल के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं।
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शुरुआत में दीपा ने प्राइवेट टीचर के रूप में नौकरी शुरू की ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके और पढ़ाई का समय भी मिल सके। कुछ समय बाद नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन उनके भाई ने उन्हें सिविल सेवा की दिशा दिखाई और UPPCS परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया। यही वह मोड़ था जिसने दीपा के जीवन में परिवर्तन लाया और उन्हें अपने सपनों के प्रति पूरी तरह समर्पित कर दिया।
घर के काम, बच्चों की परवरिश और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच दीपा ने दिन-रात मेहनत की। उन्हें लगातार लोगों के ताने और आलोचनाएं भी सुनने को मिली, लेकिन उन्होंने कभी अपना आत्मविश्वास खोया नहीं। उनका दृष्टिकोण हमेशा स्पष्ट और लक्ष्य-केंद्रित रहा। उन्होंने समझौते नहीं किए और अपनी तैयारी में पूरी मेहनत लगाई।
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40 की उम्र में, शादी के 18 साल बाद, दीपा ने यूपीपीसीएस परीक्षा क्रैक की और 166वीं रैंक के साथ PCS अफसर बनीं। यह सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है जो परिवार, घर और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखती हैं।
जब दीपा ने परीक्षा पास की थी, उनकी बड़ी बेटी 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी। उनकी कहानी साबित करती है कि यदि आपका लक्ष्य मजबूत हो और मेहनत, लगन व जूनून हो, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। दीपा ने दिखा दिया कि जिम्मेदारियों और तानों के बीच भी सफलता संभव है। उनका संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास आज लाखों लोगों के लिए मिसाल हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो हर हाल में अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखती हैं।






