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B.Tech Student Success Story: पंजाब के एक छात्र की कहानी यह साबित करती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की शुरुआत हो सकती है। 12 बार बीटेक की परीक्षाओं में फेल होने के बावजूद इस युवक ने हार नहीं मानी। मेहनत, लगन और खुद को सुधारने की कोशिशों के बल पर उसने न सिर्फ पढ़ाई पूरी की, बल्कि आज 1.5 लाख रुपये महीने की शानदार नौकरी कर रहा है। उसकी यह कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है कि जिद और आत्मविश्वास से हर मुश्किल पार की जा सकती है।
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Success Story: पंजाब के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस बीटेक छात्र की कहानी मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। कभी स्कूल की फीस भरने में मुश्किल झेलने वाले इस युवक ने लगातार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी। खुद को बेहतर बनाने की लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर उसने आज 1.15 लाख रुपये महीने की नौकरी हासिल की है। उसकी यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और हौसले से हर सपना हकीकत में बदला जा सकता है।
पिता को मिलते थे 3000 रुपये महीना
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म reddit पर एक बीटेक स्टूडेंट्स की जर्नी ने लोगों को ध्यान खींचा है। शख्स ने बताया कि कैसे गरीबी से निकलकर वह अच्छी सैलरी वाली नौकरी तक पहुंचा, जो सपने के सच होने जैसी है। पोस्ट के अनुसार, शख्स के पिता साल 1970 में बिहार से पंजाब आए थे। यहां 50 गज का घर बनाया और एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी DCM में काम करने लगे।
साल 2014 में जब पिता रिटायर हुए तो वह 12वीं क्लास में था। उन्हें पेंशन के तौर पर हर महीने सिर्फ 3000 रुपये मिलते थे। स्कूल फीस मांगने की भी हिम्मत नहीं होती थी। जैसे-तैसे पिता तीन बच्चों की फीस मैनेज करते थे।
भाइयों के लिए दिया त्याग
साल 2015 में छोटे भाई का एडमिशन एक अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में हो गया। इस बात की खुशी बहुत थी लेकिन इस बात की भी फिक्र थी कि फीस के पैसे कहां से आएंगे। पोस्ट में लिखा, ‘2015 में, मेरे भाई का IET भद्दल (बी.टेक सीएसई) में एडमिशन हो गया। मुझे चिंता थी कि मेरे पिताजी हम दोनों की कॉलेज फीस कैसे भरेंगे, इसलिए मैंने दो साल के लिए पढ़ाई दी। जब मेरा भाई दूसरे साल में था, तब हम दोनों का चयन भारतीय नौसेना (12वीं बेस) के लिए हो गया। हमने सभी चरण पास कर लिए, लेकिन फाइनल मेरिट लिस्ट, मुझे अयोग्य घोषित कर दिया गया और मेरे भाई का चयन हो गया।’
पिता के निधन के बाद टूट गया
शख्स ने पोस्ट में लिखा कि दो साल पढ़ाई से ब्रेक लेने के बाद बीटेक में एडमिशन लिया। साल 2017 में जब वह फर्स्ट ईयर में था तब पिता का निधन हो गया। शख्स ने पोस्ट में लिखा, ‘वह मेरे लिए बहुत ही दुखद रहा, मैं अंदर से टूट गया था, मुझे रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं था, लेकिन मेरी मां हमेशा मेरे साथ रहीं। मेरे कॉलेज की फीस मेरे भाई ने भरी।’
कॉलेज में 12 बार फेल
कॉलेज में, मेरा मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था, इसलिए मैंने कॉलेज को टाइमपास के तौर पर लिया। छठे सेमेस्टर में मेरे 12 बैकलॉग थे क्योंकि मैं पढ़ाई नहीं कर रहा था और न ही उसमें रुचि रखता था। लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी क्योंकि कोविड के कारण सरकार ने घर से परीक्षा देने की परमिशन दे दी थी और मैं सभी विषयों में पास हो गया। उसके बाद भी, मुझे नौकरी या अपने परिवार के लिए कमाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।’
लाइफ का टर्निंग पॉइंट
जब कुछ नजर नहीं आ रहा था तो भाई के कॉलेज फ्रेंड भवनीश अग्रवाल ने उम्मीद की किरण दिखाई। उनके पास 2 साल का एक्सपीरियंस था और वे उस समय फ्रीलांसिंग कर रहे थे। मैं अभी-अभी पास हुआ था और मुझे इसके बारे में पता भी नहीं था। प्रोग्रामिंग की बेसिक नॉलेज भी नहीं थी। तब भवनीश ने छह महीने तक गाइड किया, पायथन सिखाया और अपना करियर शुरू करने का कॉन्फिडेंस दिया। कुछ महीने बाद कई जॉब्स के लिए अप्लाई किया और TCS में 21000 रुपये महीना सैलरी वाली नौकरी मिल गई।
सैलरी का एक हिस्सा नए स्किल्स सीखने में लगाया
नौकरी मिल गई थी लेकिन पंजाब से नोएडा आया तो 21000 रुपये में गुजारा करना मुश्किल लगने लगा। आगे बढ़ने के लिए सैलरी का एक हिस्सा एडवांस्ड पायथन कोर्स करने में लगा दिया। 6 महीने पूरी लगन से पढ़ाई की। एक बार फिर भवनीश की मदद ली और नए स्किल्स व तकनीकी नॉलेज की वजह से एक स्टार्टअप में ₹9 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी मिल गई।
19 जॉब इंटरव्यू में रिजेक्शन के बाद मिला वो मौका
कुछ महीने बाद, जैसे-जैसे आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ती गईं। इसलिए अच्छी सैलरी वाली नौकरी की तलाश शुरू कर दी। एक बाद एक 19 जॉब इंटरव्यू में रिजेक्शन मिला, लेकिन दो में सफलता मिली। एक कंपनी में 15 लाख रुपये सालाना का पैकेज ऑफर मिला और दूसरे में 18.5 लाख रुपये का। आज शख्स की 1.5 लाख रुपये महीने सैलरी वाली नौकरी कर रहा है।आखिरकार उस मुकाम तक पहुंच गया जिसे उसने कभी नामुमकिन समझा था।
बीटेक स्टूडेंट की यह जर्नी इस बात का प्रमाण है कि सफलता पाने के लिए असाधारण होने की जरूरत नहीं है, बस इतना दृढ़ निश्चय होना चाहिए कि बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ते रहें।






