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यमन के सबसे बड़े प्रांत हद्रामौत में यूएई और सऊदी समर्थित सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया है। बुधवार सुबह से बड़े पैमाने पर संघर्ष जारी है, जिसमें यूएई समर्थित मिलिशिया अल-घुराफ इलाके की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है। दोनों पक्षों के बीच टकराव से क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है और स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ गई है।
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यमन के सबसे बड़े प्रांत हद्रामौत में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया है। हद्रामौत तेल और खनिज से समृद्ध क्षेत्र है और देश के एक तिहाई हिस्से पर फैलता है, साथ ही इसकी 450 किलोमीटर लंबी तटरेखा भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बुधवार से बड़े पैमाने पर हमले हुए, जिनमें तोपखाने का इस्तेमाल भी किया गया। गुरुवार को यूएई समर्थित मिलिशिया अल-घुराफ इलाके की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही थी, जबकि सऊदी समर्थित यमन की भगोड़ी सरकार अपने इलाकों को बचाने में लगी हुई है। ईरानी मीडिया और स्थानीय वीडियो में यूएई समर्थित मिलिशिया सेयुन में प्रेसिडेंशियल पैलेस पर धावा बोलते दिखाई दे रही है।
3 दिसंबर को ही यूएई समर्थित सेना ने यमन के दूसरे सबसे बड़े शहर सेयुन पर कब्जा कर लिया था, जिससे हद्रामौत में दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया। यमन के उत्तर-पश्चिम में हूती विद्रोही और अन्य क्षेत्रों में सऊदी समर्थित सरकार का नियंत्रण है। UAE समर्थित प्रशासन ने दक्षिणी इलाके को अलग करने और अहम पोर्ट्स पर नियंत्रण की कोशिश की है, जिससे सऊदी और UAE के बीच प्रतिस्पर्धा और स्पष्ट हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हद्रामौत की संपदा और रणनीतिक स्थिति इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच संघर्ष का मुख्य कारण है। आलोचक मानते हैं कि सऊदी और UAE दोनों अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए यमन के संसाधनों और भू-राजनीति पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्थिरता पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।






