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इंडिगो एयरलाइन इस महीने गंभीर संचालन संकट से जूझ रही है, जिसके चलते 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। इससे कई प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की भारी भीड़ और अव्यवस्था देखने को मिली। रोजाना करीब 2,300 फ्लाइट्स उड़ाने वाली देश की सबसे बड़ी एयरलाइन होने के बावजूद इंडिगो बढ़ती रद्दीकरण दर पर काबू नहीं पा रही है। हालात को देखते हुए सरकार एयरलाइन को अपनी उड़ानों की संख्या कम करने का निर्देश दे सकती है ताकि स्थिति को स्थिर किया जा सके।
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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस समय एक बड़े ऑपरेशनल संकट से गुजर रही है। एयरलाइन में पायलटों की भारी कमी के कारण उसके नेटवर्क में गंभीर अव्यवस्था पैदा हो गई है, जिसका असर सीधे यात्रियों पर पड़ा है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि सिर्फ इसी महीने इंडिगो को अपनी 5,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे कई एयरपोर्ट्स पर अफरातफरी और लंबी प्रतीक्षा की तस्वीरें देखने को मिलीं। रोजाना लगभग 2,300 फ्लाइट्स ऑपरेट करने वाली इस एयरलाइन के पास फिलहाल इतना क्रू उपलब्ध नहीं है कि वह सर्दियों के व्यस्त सीजन में पूरे शेड्यूल को सुचारू रूप से चला सके।
इसी पायलट संकट को देखते हुए सिविल एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए (DGCA) इंडिगो को फरवरी तक अपनी उड़ानों की संख्या में बड़ी कटौती करने का निर्देश दे सकता है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयरलाइन को सर्दियों के शेड्यूल के दौरान प्रतिदिन करीब 300 उड़ानें कम चलाने को कहा जा सकता है। सर्दियों का यह शेड्यूल अक्टूबर के आखिरी रविवार से शुरू होकर मार्च के आखिरी रविवार तक चलता है, इसलिए आने वाले महीनों में इसका असर यात्रियों पर और ज्यादा दिख सकता है।
इस बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को काबू में रखने के लिए एयर इंडिया और अन्य एयरलाइनों से अतिरिक्त उड़ानें जोड़ने की अपील की है, ताकि इंडिगो के द्वारा की जाने वाली कटौती के बीच बढ़ी हुई मांग को पूरा किया जा सके। डीजीसीए ने इंडिगो के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया है और उनसे भर्ती योजना, प्रशिक्षण क्षमता और क्रू शेड्यूलिंग का विस्तृत रोडमैप मांगा है, जिससे यह तय किया जा सके कि मौजूदा संसाधनों के साथ एयरलाइन कितनी उड़ानें सुरक्षित रूप से संचालित कर सकती है।
संकट को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि अगले हफ्ते से उत्तर भारत में भारी कोहरे की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में उड़ानों में देरी और रद्द होने की संभावना और बढ़ सकती है। इंडिगो के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एयरलाइन को अपने पूरे शेड्यूल को सुचारू रूप से चलाने के लिए अगले तीन महीनों में पायलटों की उपलब्धता में पर्याप्त वृद्धि करनी होगी। लेकिन यह आसान नहीं है, क्योंकि कैप्टन-लेवल पायलट तैयार करने में महीनों का ऑन-ग्राउंड और इन-फ्लाइट ट्रेनिंग लगता है।
फिलहाल इंडिगो अपने ऑपरेशंस को धीरे-धीरे स्थिर करने की कोशिश कर रही है। रविवार को एयरलाइन ने लगभग 1,650 उड़ानें संचालित कीं, जो शनिवार को चले 1,578 फ्लाइट्स से कुछ ज्यादा थीं। हालांकि लाखों यात्रियों पर इसका असर पड़ा है—पिछले पांच दिनों में हजारों लोग एयरपोर्ट्स पर फंसे रहे, कई उड़ानों के बदले कोई विकल्प नहीं दिया गया, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर भी एयरलाइन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, और कई लोगों ने इंडिगो पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कुल मिलाकर, इंडिगो के सामने मौजूदा स्थिति में पायलटों की भर्ती, प्रशिक्षण और ऑपरेशन को स्थिर करना सबसे बड़ी चुनौती है, जबकि सरकार और डीजीसीए स्थिति को संभालने के लिए निरंतर निगरानी कर रहे हैं।






