Bhaum Pradosh Vrat 2025: कथा और पाठ से पाएं भगवान हनुमान और महादेव की कृपा


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Bhaum Pradosh Vrat हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है और हर महीने की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। व्रत के साथ कथा का पाठ करना भी जरूरी होता है, जिससे व्रती को भगवान हनुमान और महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

भौम प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ने वाला विशेष व्रत है और इसे रखने से पाप, व्याधि और दुखों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत के दौरान व्रती को गेहूं और गुड़ का भोजन करना चाहिए और घर में लीपने या मिट्टी खोदने से बचना चाहिए। कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर में एक वृद्धा रहती थी, जिसका पुत्र मंगलिया था। वृद्धा को हनुमानजी पर गहरी श्रद्धा थी और वह हर मंगलवार व्रत रखकर उनका यथाविधि भोग लगाया करती थी।

समय के साथ उसकी भक्ति इतनी प्रगाढ़ हो गई कि हनुमानजी ने उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। वे साधु का रूप धारण कर वृद्धा के द्वार पर आए और कहा कि वे भूखे हैं और थोड़ा भोजन चाहेंगे। साधु ने वृद्धा से कुछ जमीन लीपने के लिए कहा, जिससे वृद्धा थोड़ी दुविधा में पड़ गई, लेकिन उसने साधु की सेवा करने का वचन दे दिया। इसके बाद साधु ने उसकी भक्ति की परीक्षा के लिए और कठोर परीक्षण किए। उन्होंने वृद्धा से कहा कि वह अपने पुत्र मंगलिया को ओंधा लिटाकर उसकी पीठ पर आग जलाए ताकि भोजन तैयार हो। वृद्धा को यह सुनकर अत्यधिक दुख हुआ, लेकिन उसने अपने वचन को निभाते हुए आदेश का पालन किया। उसने अपने पुत्र मंगलिया को ओंधा लिटाकर साधु की आज्ञा के अनुसार पीठ पर आग लगाई।

भोजन तैयार होने के बाद साधु ने वृद्धा से कहा कि अब वह अपने पुत्र को बुलाकर भोग में शामिल करे। वृद्धा अत्यंत दुखी हुई, लेकिन उसे करना पड़ा। जब मंगलिया बाहर से हंसता हुआ आया और जीवित दिखाई दिया, तो वृद्धा को बड़ी राहत और प्रसन्नता मिली। इसके बाद साधु ने अपना असली रूप प्रकट किया और हनुमानजी ने अपनी कृपा से वृद्धा को आशीर्वाद दिया। वृद्धा की भक्ति और निष्ठा के कारण उसका जीवन सफल हुआ और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

इस प्रकार, भौम प्रदोष व्रत न केवल व्रती को मानसिक और आध्यात्मिक बल देता है, बल्कि भगवान हनुमान और महादेव की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम भी बनता है। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि श्रद्धा, भक्ति और वचनपालन से व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

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