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जहाँ दूसरी तिमाही में भारत की GDP 8.2% की मजबूत रफ्तार से बढ़ी, वहीं अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन (IIP) बड़ी गिरावट के साथ सिर्फ 0.4% बढ़ा, जो पिछले 13 महीनों में सबसे कम है। पिछले साल अक्टूबर में IIP 3.7% और सितंबर में 4.6% की दर से बढ़ा था, जिससे उद्योगों में सुस्ती साफ झलकती है।
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अक्टूबर में भारत का औद्योगिक उत्पादन (IIP) पिछले 13 महीनों में सबसे कम स्तर पर आ गया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर औद्योगिक उत्पादन केवल 0.4% बढ़ा, जबकि पिछले साल अक्टूबर में यह 3.7% और सितंबर में 4.6% था। यह धीमी वृद्धि माइनिंग, पावर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में सुस्त प्रदर्शन के कारण हुई। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन 1.8% बढ़ा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.4% था। माइनिंग उत्पादन 1.8% घट गया, जो पिछले साल 0.9% बढ़ा था। वहीं, बिजली उत्पादन भी 6.9% कम रहा, जबकि सालभर पहले यह 2% बढ़ा था। इसके अलावा, टीवी और फ्रिज जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में ग्रोथ माइनस 0.5% और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में माइनस 4.4% रही। इस वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर तक औद्योगिक उत्पादन की औसत ग्रोथ 2.7% रही, जो पिछले वर्ष 4% थी।
विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर में उत्पादन की धीमी रफ्तार का प्रमुख कारण लंबी बारिश का मौसम रहा, जिसने माइनिंग और बिजली उत्पादन पर नकारात्मक असर डाला। इसके अलावा अक्टूबर में त्योहारों और कम वर्किंग डेज होने के कारण औद्योगिक गतिविधियां सीमित रहीं। बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकनॉमिस्ट मदन सवनवीस के अनुसार, उद्योग के लिए तीसरी तिमाही अहम साबित होगी क्योंकि GST में कटौती और कम इनकम टैक्स रेट के असर से लोगों का खर्च बढ़ने की संभावना है, जिससे मांग में सुधार आ सकता है।
इसके साथ ही, HSBC इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) नवंबर में 55.6 पर आ गया, जो अक्टूबर में 59.2 था। रिपोर्ट में कहा गया कि सेल्स और प्रोडक्शन में सुस्त बढ़ोतरी ने इस गिरावट को प्रभावित किया। यह फरवरी के बाद कामकाजी स्थितियों में सुधार की सबसे धीमी गति रही। HSBC की चीफ इंडिया इकनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ के चलते मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ सुस्त रही और नए एक्सपोर्ट ऑर्डर 13 महीनों के सबसे निचले स्तर पर आए।
कुल मिलाकर, अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन की धीमी रफ्तार और मैन्युफैक्चरिंग PMI के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि उद्योगों में सक्रियता अपेक्षाकृत कमजोर रही। हालांकि, आगामी तिमाही में GST कटौती और टैक्स रेट में कमी का असर मांग और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों में सुधार आने की उम्मीद है।






