Bilaspur Train Accident: बड़ा खुलासा — साइको टेस्ट में फेल लोको पायलट के हवाले थी ट्रेन, रेलवे की लापरवाही से मचा हड़कंप


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Bilaspur Train Accident Probe: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के समय ट्रेन चला रहा लोको पायलट साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल पाया गया था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मानव चूक इस दुर्घटना की एक बड़ी वजह बनी। इस खुलासे के बाद रेलवे विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

Bilaspur Train Accident

Bilaspur Train Accident Investigation: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 4 नवंबर को हुए दर्दनाक रेल हादसे की जांच में रेलवे प्रशासन की बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिस लोको पायलट विद्यासागर को मेमू लोकल ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वह रेलवे के अनिवार्य साइकोलॉजिकल टेस्ट (Psychological Test) में फेल हो गया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए उसे ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी। रेलवे में यह टेस्ट इसलिए कराया जाता है ताकि चालक की मानसिक स्थिति, निर्णय लेने की क्षमता और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया का सही मूल्यांकन किया जा सके।

4 नवंबर की रात गेवरारोड स्टेशन के पास मेमू लोकल और मालगाड़ी की टक्कर में लोको पायलट विद्यासागर सहित 11 लोगों की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की तकनीकी खराबियों को वजह बताया गया था, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि मानव लापरवाही भी इस भीषण हादसे का प्रमुख कारण थी।

सूत्रों के मुताबिक, विद्यासागर ने जून 2024 में हुए साइको टेस्ट में असफलता पाई थी, जिसकी जानकारी रेलवे प्रशासन को थी। बावजूद इसके, उन्हें ट्रेन संचालन की अनुमति दे दी गई और एक सहायक चालक रश्मि राज को उनके साथ तैनात किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न केवल सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है बल्कि यात्रियों की जान को जोखिम में डालने वाला कदम भी साबित हुआ।

जांच में यह भी सामने आया है कि विद्यासागर की पदोन्नति से जुड़ी फाइल विभिन्न अधिकारियों के पास से होकर गुजरी थी, जिसमें वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता और परिचालन विभाग शामिल थे। इन अधिकारियों ने बिना उचित परीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा किए प्रमोशन की मंजूरी दे दी। अब इस पूरे मामले में रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) ने कड़ा रुख अपनाया है और 19 कर्मचारियों व अधिकारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रेलवे सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े उच्च अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जा सकती है। इस लापरवाही ने न केवल रेलवे के सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि प्रशासनिक स्तर पर नियमों की अनदेखी किस तरह से बड़े हादसों को जन्म दे सकती है।

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