गठिया को जड़ से कैसे खत्म करें? AIIMS डॉ. ने बताया 7000 स्टेप चलने का नियम, जोड़ों में जान भरने का देसी फार्मूला


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डॉक्टर ने बताया कि अर्थराइटिस आज युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रोजाना की कुछ आदातों में बदलाव करके इससे आसानी से बचा जा सकता है। डॉक्टर ने कुछ तरीके बताए हैं जो आपको गठिया का मरीज बनने से रोक सकते हैं।

arthritis treatment
आर्थराइटिस यानी गठिया की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। अब सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युआ भी गठिया की चपेट में आ रहे हैं। अब 25–40 साल की उम्र वाले लोग भी जॉइंट दर्द, जकड़न और सूजन की समस्या झेल रहे हैं।

गठिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में तकलीफ होने लगती है। यह बीमारी शरीर के जोड़ जैसे घुटने, कंधे, कोहनी, उंगलियां आदि को प्रभावित करती है। जब इन जोड़ो की अंदर की परत या कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है या उसमें सूजन आ जाती है, तो इसे गठिया कहा जाता है।

एम्स नई दिल्ली के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर डॉक्टर भावुक गर्ग से जब किसी पीड़ित ने पूछा कि गठिया की समस्या होने पर आराम पाने के लिए क्या करना चाहिए? तो बताया (ref.) कि गठिया की समस्या क्यों बढ़ रही है, इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है और सबसे जरूरी गठिया को ठीक करने के लिए रोजाना कितना चलना चाहिए।

गठिया की बीमारी होने के कारण

गठिया की बीमारी होने के कारण

डॉक्टर ने बताया कि लाइफस्टाइल का बदलना ही अर्थराइटिस बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है। हड्डियों और जोड़ों की मजबूती हमारी अच्छी डाइट, रोजाना की फिजिकल एक्टिविटी और मांसपेशियों की ताकत पर निर्भर करती है। अब न तो खाना पहले जैसा पौष्टिक रहा है और न ही लोग नियमित एक्सरसाइज करते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल–लैपटॉप का ज्यादा उपयोग, गलत पोश्चर, धूप में न जाना और विटामिन D की कमी, ये सब मिलकर जॉइंट्स को कमजोर कर देते हैं। इसी कारण युवा उम्र में भी अर्थराइटिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

लंबे समय तक बैठे रहना गठिया की सबसे बड़ी वजह

लंबे समय तक बैठे रहना गठिया की सबसे बड़ी वजह

डॉक्टर के अनुसार, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना अर्थराइटिस का बड़ा कारण है। चाहे ऑफिस का काम हो या घर का, घंटों लगातार बैठने से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जॉइंट्स पर दबाव बढ़ता है और पोश्चर खराब हो जाता है। धीरे-धीरे यही आदत दर्द और जॉइंट प्रॉब्लम की शुरुआत बन जाती है। इसलिए दिनभर में थोड़ा-थोड़ा चलना, उठना-बैठना और स्ट्रेचिंग करना बेहद जरूरी है।

गठिया में कितने स्टेप चलना चाहिए

गठिया में कितने स्टेप चलना चाहिए

डॉक्टर ने बताया कि 10 हजार स्टेप्स रोज चलने की सलाह एक जापानी वॉकिंग ऐप से शुरू हुआ ट्रेंड है। रिसर्च बताती है कि रोज 7 से 8 हजार स्टेप्स चलना भी सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद होता है। बेशक 10 हजार स्टेप्स तक चलना ठीक है, लेकिन उससे ज्यादा चलने पर लाभ बढ़ता नहीं है। अगर घुटने या रीढ़ में दर्द है, तो ज्यादा चलना नुकसान भी कर सकता है, इसलिए ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

गठिया से बचने का सिंपल फंडा

गठिया से बचने का सिंपल फंडा

डॉक्टर ने बताया कि गठिया से बचने का सिंपल नियम यही है कि जितना आप मूवमेंट करेंगे, उतना आपके शरीर के लिए बेहतर होगा। अगर आप बिल्कुल नहीं चलते, तो कम से कम थोड़ा चलना भी आपके जॉइंट्स और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद होता है। थोड़ी-सी एक्टिविटी भी सेहत सुधारने की दिशा में एक अच्छा कदम है।

नी रिप्लेसमेंट कब कराना चाहिए?

नी रिप्लेसमेंट कब कराना चाहिए?

आजकल जीवन की उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोग अपनी लाइफ क्वालिटी को लेकर ज्यादा सजग हैं। ऐसे में अगर घुटनों का दर्द रोजमर्रा की जिंदगी में दिक्कत पैदा करे, तो नी रिप्लेसमेंट काफी मददगार साबित होता है। लेकिन अक्सर लोग एक्स-रे में थोड़ा-बहुत घिसाव दिखने पर डर जाते हैं। ध्यान रखें कि इलाज एक्स-रे का नहीं, मरीज के लक्षणों का होता है।

इस बात का रखें ध्यान

इस बात का रखें ध्यान

नी रिप्लेसमेंट तभी कराया जाता है जब रोज़ दवा खानी पड़े, दर्द से नींद न आए, चलना-फिरना मुश्किल हो जाए, बाहर निकलने में डर लगे और एक्स-रे में भी गंभीर नुकसान दिखे। इन हालात में ही सर्जरी की जरूरत होती है, वरना ज्यादातर लोगों का दर्द दवाइयों, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज और सही पोश्चर से ही कंट्रोल हो जाता है। यह कोई इमरजेंसी सर्जरी नहीं है और कई बार दर्द की वजह घुटना नहीं बल्कि शरीर का कोई और हिस्सा होता है, इसलिए सही जांच और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।

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