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UPSC की कठिन परीक्षा जिसे पास करने में कई छात्रों को वर्षों लग जाते हैं, वहीं शालिनी ने इसे एक अनोखी प्रेरणा से जीत लिया। अपनी मां के साथ हुए अपमान ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और इसी दर्द ने उन्हें अफसर बनने का संकल्प दिया। बिना किसी कोचिंग, महंगे गाइडेंस या बड़े संसाधनों के शालिनी ने खुद पर भरोसा रखते हुए UPSC की तैयारी की और मेहनत के दम पर परीक्षा पास कर ली। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादे और सही दिशा—दोनों मिल जाएँ तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
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UPSC IPS Success Story in Hindi: मां का अपमान हुआ…दर्द धीरे-धीरे हिम्मत बनकर पनपता गया। घर की परिस्थतियां, समाज की निगाहें और साधनों की कमी ने भी रोकने की बजाय आगे बढ़ने की ताकत दी। बस कंडक्टर की बेटी ने कभी खुद को कम नहीं समझा। दिन-रात मेहनत की, संघर्षों में बढ़कर बगैर कोचिंग की तैयारी…और सही दिशा में खुद को झोंक दिया। यह महज कोई कहानी नहीं बल्कि शालिनी अग्निहोत्री (Shalini Agnihotri) ने इसे जिया है। UPSC क्रैक IPS बनीं और सफलता का उजाला बिखेरा। यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को यह सक्सेस स्टोरी जरूर पढ़नी चाहिए जो संघर्ष से सफलता तक का सफर बताती है।
धर्मशाला में स्कूल की पढ़ाई, 10वीं में इतने अंक
एक इंटरव्यू में शालिनी अग्निहोत्री बताती हैं कि वह हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की रहने वाली हैं। उनके पिता बस कंडक्टर रहे। उनकी शुरुआती पढ़ाई धर्माशाला में हुई है। वह बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं। उन्होंने 10वीं में 92 प्रतिशत अंक और 12वीं में 77 प्रतिशत अंक पाए थे।
एग्रीकल्चर में डिग्री और फिर UPSC का सफर
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद शालिनी हिमाचल यूनिवर्सिटी पहुंची। यहां से एग्रीकल्चर में ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद MSc में एडमिशन लिया। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की ओर रुख किया है और UPSC की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि इसका सपना उन्होंने बहुत पहले ही देख लिया था।
वह घटना…जिसने जीवन दिया बदल
शालिनी एक बार सफर कर रही थीं। इस दौरान उनकी मां भी उनके साथ थी। किसी ने उनके मां के साथ बदतमीजी कर दी। इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया। उस दिन उन्होंने महसूस किया कि उन्हें इतना सक्षम बनना है कि किसी भी अन्याय के खिलाफ खड़े हो सकें। इसी घटना ने उन्हें अधिकारी बनने की प्रेरणा दी।
बगैर कोचिंग UPSC में सफलता
यूपीएससी की कोचिंग में छात्र मोटी फीस देते हैं लेकिन शालिनी ने कोचिंग को न कह दिया। ऑनलाइन स्टडी मटीरियल की मदद से और खुद की मेहनत से तैयारी की। UPSC CSE 2011 में उन्होंने 285वीं रैंक हासिल की और उनका सेलेक्शन बतौर IPS हुआ।
दोबारा भी क्रैक किया एग्जाम, प्रेरणादायक सफर
2011 में IPS बनने के बाद शालिनी ने 2012 में भी UPSC पास किया। आज वह मेहनत, हिम्मत और सकारात्मक सोच का उदाहरण हैं। उनकी कहानी बताती है कि यूपीएससी में कोचिंग के बगैर भी सफलता पाई जा सकती है। इसके लिए लक्ष्य पर निगाह और बड़े सपने पूरे करने की हिम्मत लानी जरूरी है।






