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शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी जीवनी में खुलकर स्वीकार किया है कि पूनम सिन्हा से शादी के बाद भी उनका रिश्ता रीना रॉय के साथ जारी था। उन्होंने बताया कि उस दौर में हालात इतने उलझ चुके थे कि उनके भाई ने यहां तक दबाव बनाया कि उन्हें रीना रॉय से ही शादी करनी चाहिए। इसी तनावपूर्ण स्थिति के बीच पूनम पहले से ही 8 महीने की प्रेग्नेंट थीं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया था।
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शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन का यह अध्याय उनकी निजी और पेशेवर दोनों पहचानों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय साबित हुआ। 1970 के दशक में सुपरस्टारडम के शिखर पर मौजूद शत्रुघ्न एक ओर अपने करियर के सुनहरे दौर से गुजर रहे थे, वहीं दूसरी ओर उनकी प्रेम कहानी, शादी और रिश्तों के द्वंद्व ने उन्हें गहरे तनाव में डाल दिया था। रीना रॉय के साथ उनके रिश्ते की चर्चा उस समय अखबारों की सुर्खियों में रहती थी, लेकिन 1980 में अचानक पूनम सिन्हा से शादी करने का उनका निर्णय सबको चौंका गया। इसके बावजूद, शादी के बाद भी उनका और रीना का रिश्ता पूरी तरह नहीं टूटा, जिससे दोनों ओर गहरी भावनात्मक उलझनें पैदा हो गईं। रीना को उम्मीद थी कि शत्रुघ्न उनसे भी शादी करेंगे, जबकि पूनम अपनी शादी और गर्भावस्था के बीच टूट रही थीं।
अपनी आत्मकथा ‘एनीथिंग बट खामोश’ में शत्रुघ्न लिखते हैं कि इस दौर में वे लगातार अपराधबोध में जी रहे थे—घर पर रहते तो पत्नी के लिए दोषभावना, और जब रीना के साथ होते तो उन्हें धोखा देने का एहसास। इसी समय हालात तब और भी कठिन हो गए जब उनके बड़े भाई राम ने उन पर रीना रॉय से शादी करने का दबाव बनाना शुरू किया। उन्होंने न सिर्फ रीना से वादा कर दिया था, बल्कि शत्रुघ्न को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने उनकी बात नहीं मानी, तो वह उनके अफेयर को सार्वजनिक कर देंगे। यह सब उस वक्त हुआ जब पूनम आठ महीने की गर्भवती थीं और दो बच्चों—लव और कुश—को जन्म देने वाली थीं। भाई द्वारा दबाव, परिवार की चिंता और दो रिश्तों में फंसे होने की पीड़ा ने शत्रुघ्न को मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
स्थिति तब अपनी चरम पर पहुंच गई जब राम ने पूरे परिवार को एक पत्र लिखा, जिसमें शत्रुघ्न और रीना के रिश्ते का विस्तार से ज़िक्र था, और अंत में लिखा था कि ‘उन्हें रीना से शादी करनी ही होगी।’ यह पत्र उनके मैनेजर पवन कुमार को मिला, जिन्होंने तुरंत स्थिति संभालते हुए शत्रुघ्न को सूचित किया और उनकी वैवाहिक जिंदगी को टूटने से बचाया। इन जटिल परिस्थितियों के बीच रीना रॉय ने भी आगे बढ़ते हुए पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी करने का फैसला किया।
इन वर्षों की घटनाओं ने शत्रुघ्न को न सिर्फ रिश्तों की कड़वी सच्चाई सिखाई, बल्कि उन्हें अपने ही परिवार के भीतर मौजूद दूरी और ईर्ष्या का भी एहसास दिलाया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें धीरे-धीरे समझ आया कि उनके भाई राम उनकी सफलता से सहज नहीं थे—वे उनकी शादी में शामिल नहीं हुए, न ही कठिन समय में साथ खड़े हुए, और यहां तक कि माता-पिता के अंतिम समय में भी उपस्थित नहीं रहे। यह अध्याय शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन का सबसे भावनात्मक, सीख देने वाला और दर्दनाक हिस्सा साबित हुआ, जिसने उनके रिश्तों, करियर और निजी जीवन को गहराई से प्रभावित किया।






