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खुफिया सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश भारत के रणनीतिक रूप से अहम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के बेहद करीब स्थित लालमोनिरहाट एयरफील्ड को सैन्य उपयोग के लिए सक्रिय करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में यह कदम चीन और तुर्की से मिल रहे रक्षा सहयोग के तहत उठाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में बांग्लादेश सेना की भी सीधी भागीदारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है, क्योंकि लालमोनिरहाट का यह इलाका भूटान और भारत की सीमा से बहुत पास स्थित है।

ढाका से मिली ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब स्थित लालमोनिरहाट एयरफील्ड को सैन्य उपयोग के लिए सक्रिय करने की योजना बना रहा है। यह कदम बांग्लादेश की उस पुरानी प्रतिबद्धता के विपरीत है, जिसमें उसने इस हवाई क्षेत्र को केवल नागरिक उद्देश्यों तक सीमित रखने का आश्वासन दिया था। वर्ष 2025 में तत्कालीन ब्रिगेडियर जनरल नाजिम-उद-दौला ने सार्वजनिक रूप से इस आश्वासन की पुष्टि की थी, लेकिन अब उनके मेजर जनरल बनने के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। भारतीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने संसद में इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत सरकार ने लालमोनिरहाट एयरबेस से जुड़ी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी हुई है।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश की सेना अब लालमोनिरहाट एयरबेस को सैन्य उद्देश्यों के लिए विकसित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है, जबकि पहले उसने ऐसा न करने का वादा किया था। यह एयरबेस भारत की सीमा से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यहां एक बड़ा हैंगर बनाया जा रहा है और वायु रक्षा प्रणाली के हिस्से के रूप में एक नई रडार यूनिट लगाने की तैयारी भी जारी है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश इस एयरबेस को चीन और तुर्की से मिले सैन्य ड्रोन के ऑपरेशनल बेस के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। वहीं, 16 अक्टूबर को भारतीय सैन्य खुफिया अधिकारियों की एक टीम ने बांग्लादेशी सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान के साथ लालमोनिरहाट और ठाकुरगांव एयरफील्ड का दौरा किया था, लेकिन इसके बावजूद एयरबेस पर निर्माण कार्य जारी है। ये घटनाक्रम भारत-बांग्लादेश सीमाई क्षेत्र में नई रणनीतिक हलचल का संकेत दे रहे हैं।






