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राजस्थान के उदयपुर के पुलिस अधिकारी हिमांशु सिंह राजावत अब रियल लाइफ के बाद रील लाइफ में भी अपना जलवा दिखाने जा रहे हैं। वह जल्द ही फिल्म ‘सागवान’ में लीड रोल में नजर आएंगे, जिसमें उनका दबंग और प्रेरणादायक अंदाज देखने को मिलेगा। ड्यूटी पर ईमानदारी और जोश से काम करने वाले इस पुलिस अफसर की रियल कहानी अब बड़े पर्दे पर भी लोगों को प्रेरित करेगी।
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राजस्थान पुलिस के जांबाज अधिकारी हिमांशु सिंह राजावत अब रियल लाइफ के साथ-साथ रील लाइफ में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रहे हैं। उदयपुर में कार्यरत हिमांशु, जो अपने बेबाक और दबंग अंदाज के लिए जाने जाते हैं, अब फिल्म ‘सागवान’ में लीड रोल निभाते नजर आएंगे। यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित है — 2019 में हुई एक लड़की की हत्या के मामले पर आधारित मर्डर मिस्ट्री, जिसकी स्क्रिप्ट खुद हिमांशु सिंह राजावत ने लिखी है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में कोई प्रोफेशनल एक्टर नहीं है; सभी कलाकार पुलिस विभाग से जुड़े हुए हैं, जिससे फिल्म को एक रियलिस्टिक टच मिला है।
फिल्म का टीज़र हाल ही में उदयपुर में लॉन्च किया गया, जहां राजस्थान के जाने-माने अधिकारी और “राजस्थान के सिंघम” कहे जाने वाले एडीजी दिनेश एमएन, जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी और मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह भी मौजूद थे। इस अवसर पर हिमांशु सिंह राजावत ने बताया कि फिल्म का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश देना है। फिल्म समाज के उन पहलुओं को उजागर करती है जो आमतौर पर पर्दे के पीछे रह जाते हैं — जैसे पुलिसकर्मियों की असल ज़िंदगी की चुनौतियाँ, ईमानदारी, और सेवा की भावना।
‘सागवान’ की शूटिंग राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में की गई है, जहाँ टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से फिल्म को पूरा किया। हिमांशु ने बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन पुलिसकर्मियों के जज्बे और टीमवर्क ने हर चुनौती को पार किया। खास बात यह भी है कि इस फिल्म का कोई स्पॉन्सर नहीं है; हिमांशु ने खुद बताया कि फिल्म से होने वाली सारी आय समाज कल्याण और सामाजिक सेवा के कार्यों में लगाई जाएगी।
हिमांशु सिंह राजावत का नाम पहले भी सुर्खियों में रह चुका है। 2005 के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में उनकी भूमिका चर्चा का विषय बनी थी, जिसके बाद उन्हें सात साल से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। लेकिन 2018 में मुंबई की विशेष अदालत ने उन्हें निर्दोष करार दिया और वे पूरी तरह बरी हो गए। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और मजबूत किया और अब ‘सागवान’ के ज़रिए उसी भावना को बड़े पर्दे पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजावत का यह कदम न सिर्फ एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सेवा और प्रेरणा किसी भी मंच से दी जा सकती है — चाहे वो थाने की वर्दी हो या सिनेमा का पर्दा। अब देखना यह है कि रियल लाइफ के इस हीरो का रील अवतार दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।






