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‘ईद के दिन मंदिर के पास मांस मिलने के बाद माहौल बहुत बिगड़ गया था। सब ने इसे संभालने की कोशिश की, लेकिन अगले दिन फिर वही घटना हो गई। इस बार तो मंदिर पर पुलिस भी तैनात थी। ये सब देखकर यहां लोग डरे हुए हैं। बच्चे स्कूल-कॉलेज जाने में डर रहे हैं। लोग बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। हम चाहते हैं कि धुबरी में फिर से शांति हो।’
सलीम खान असम के धुबरी जिले में रहते हैं। 7 जून को बकरीद के दिन यहां हनुमान मंदिर के सामने कथित तौर पर गोमांस मिलने के बाद हिंसा भड़क गई। इसके बाद बिगड़े माहौल को लेकर सलीम परेशान हैं। वे कहते हैं कि हम सब यहां मिलजुलकर रहते आ रहे हैं। पिछले दिनों हालात कैसे बिगड़े, समझ नहीं आ रहा। धुबरी के लोगों का कहना है कि यहां कोई साम्प्रदायिक हिंसा नहीं हुई, सिर्फ दंगों की अफवाह फैल गई।
हालांकि, असम के CM हिमंत बिस्व सरमा इसके पीछे धुबरी में पनप रहे ‘नए बीफ माफिया’ का हाथ बताते हैं। उन्होंने ‘नबीन बांग्ला’ नाम के एक संगठन पर धुबरी को बांग्लादेश में शामिल करने वाले भड़काऊ पोस्टर लगाने का भी आरोप लगाया। CM हिमंत दो बार धुबरी भी पहुंचे। उनके दौरे के बाद पुलिस ने जिले में शूट-एट-साइट के आदेश दे दिए।

धुबरी बांग्लादेश की सीमा से सटा इलाका है, इसीलिए काफी संवेदनशील माना जाता है। हिंसा भड़कने के बाद अब धुबरी में क्या हालात हैं? हिंदू-मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर ग्राउंड जीरो पर पहुंचा।
सबसे पहले जानिए… आखिर 7 जून को धुबरी में हुआ क्या था असम का धुबरी जिला ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसा है। ये बांग्लादेश की सीमा पर भारत का अंतिम जिला है। यहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है।
यहां 7 जून को बकरीद के दिन वार्ड नंबर-3 में हनुमान मंदिर के सामने कथित तौर पर गोमांस के टुकड़े मिले। इसे लेकर इलाके में तनाव बढ़ा। हालात देखते हुए जिला प्रशासन ने हिंदू और मुस्लिम पक्ष के लोगों को साथ बैठाकर मीटिंग की। इसमें शांति बनाए रखने की अपील की गई।
8 जून को मंदिर के सामने दोबारा मांस के टुकड़े मिले। इसके बाद हिंसा भड़क गई। रात को ही जिले में कई जगह पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं। देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया। दुकानों और गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इसके कई वीडियो भी सामने आए।
हम धुबरी में कोई तनाव नहीं चाहते, ये माहौल बिगाड़ने की साजिश सलीम खान धुबरी जिला मरकज कमेटी के सेक्रेटरी भी हैं। वे 7 जून की घटना को लेकर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि जब मंदिर पर पुलिसबल तैनात था, फिर दोबारा ये घटना कैसे हो गई। उन्होंने बताया-, ‘ईद के एक दिन बाद हम लोग एक साथ बैठे थे। DC, उपायुक्त, SP और एडिशनल SP समेत सभी अधिकारी थे। तब तक मामला ठंडा हो चुका था। रात में वहां पुलिस भी तैनात हो गई। फिर अगले दिन दोबारा ऐसा कैसे हुआ।’
धुबरी के माहौल को लेकर वे आगे कहते हैं, ‘फिलहाल तो यहां माहौल पहले से शांत है, लेकिन लोग अब भी डरे हुए हैं। वे स्कूल-मार्केट जाने से भी कतरा रहे हैं।’ वे कहते हैं, ‘धुबरी में सब एक साथ रहते हैं, एक साथ उठते-बैठते हैं। हम नहीं चाहते कि यहां माहौल बिगड़े। हर दिन ऐसे ही भाईचारा बना रहे।’



धुबरी के ही रहने वाले सोशल एक्टिविस्ट दिलीप मजूमदार इसे शरारती तत्वों का काम बताते हैं। वे कहते हैं,
धुबरी के लिए ये शर्म की बात है कि ऐसी घटनाएं हो रही हैं और इन्हें कवर करने के लिए नेशनल मीडिया आ रहा है। धुबरी का कल्चर हमेशा अच्छा रहा है, यहां का नाम मीडिया में हमेशा अच्छे कामों के लिए आना चाहिए।

वे आगे कहते हैं, ‘मंदिर के पास ऐसा कुछ रखने का काम कोई अपराधी ही कर सकता है। मुझे नहीं लगता कोई जानबूझकर ऐसा करेगा। कोई बदमाश ही होगा जो पूरे धुबरी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।‘
अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील करते हुए वे कहते हैं, ‘मैं सबसे रिक्वेस्ट करूंगा कि प्लीज अफवाहों पर यकीन मत कीजिए। हमारी गवर्नमेंट अच्छा काम कर रही है। अशांति से लोगों का बिजनेस डिस्टर्ब हो रहा है। धुबरी के लोग बहुत अच्छे हैं। बहुत कोऑपरेटिव हैं। किसी एक के बुरे काम के लिए हम माहौल नहीं खराब करना चाहते।‘
हम धुबरी में कोई तनाव नहीं चाहते, ये माहौल बिगाड़ने की साजिश सलीम खान धुबरी जिला मरकज कमेटी के सेक्रेटरी भी हैं। वे 7 जून की घटना को लेकर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि जब मंदिर पर पुलिसबल तैनात था, फिर दोबारा ये घटना कैसे हो गई। उन्होंने बताया-, ‘ईद के एक दिन बाद हम लोग एक साथ बैठे थे। DC, उपायुक्त, SP और एडिशनल SP समेत सभी अधिकारी थे। तब तक मामला ठंडा हो चुका था। रात में वहां पुलिस भी तैनात हो गई। फिर अगले दिन दोबारा ऐसा कैसे हुआ।’
धुबरी के माहौल को लेकर वे आगे कहते हैं, ‘फिलहाल तो यहां माहौल पहले से शांत है, लेकिन लोग अब भी डरे हुए हैं। वे स्कूल-मार्केट जाने से भी कतरा रहे हैं।’ वे कहते हैं, ‘धुबरी में सब एक साथ रहते हैं, एक साथ उठते-बैठते हैं। हम नहीं चाहते कि यहां माहौल बिगड़े। हर दिन ऐसे ही भाईचारा बना रहे।’
धुबरी के ही रहने वाले सोशल एक्टिविस्ट दिलीप मजूमदार इसे शरारती तत्वों का काम बताते हैं। वे कहते हैं,

धुबरी के लिए ये शर्म की बात है कि ऐसी घटनाएं हो रही हैं और इन्हें कवर करने के लिए नेशनल मीडिया आ रहा है। धुबरी का कल्चर हमेशा अच्छा रहा है, यहां का नाम मीडिया में हमेशा अच्छे कामों के लिए आना चाहिए।

वे आगे कहते हैं, ‘मंदिर के पास ऐसा कुछ रखने का काम कोई अपराधी ही कर सकता है। मुझे नहीं लगता कोई जानबूझकर ऐसा करेगा। कोई बदमाश ही होगा जो पूरे धुबरी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।‘
अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील करते हुए वे कहते हैं, ‘मैं सबसे रिक्वेस्ट करूंगा कि प्लीज अफवाहों पर यकीन मत कीजिए। हमारी गवर्नमेंट अच्छा काम कर रही है। अशांति से लोगों का बिजनेस डिस्टर्ब हो रहा है। धुबरी के लोग बहुत अच्छे हैं। बहुत कोऑपरेटिव हैं। किसी एक के बुरे काम के लिए हम माहौल नहीं खराब करना
यहां हिंसा नहीं हुई, बस दंगों की अफवाह फैल गई हमने बकरीद पर बने माहौल को लेकर धुबरी के लोगों से भी बात की। यहां रहने वाले दिलीप कुमार दत्त बताते हैं कि अभी तो यहां शांति है। हिंदू-मुसलमान सब पहले की तरह साथ रह रहे हैं। वे कहते हैं, ‘असम के CM ने हालात संभाल लिया है। फिलहाल यहां ज्यादा दिक्कत नहीं है।’ दिलीप मानते हैं कि उस दिन भी साम्प्रदायिक हिंसा जैसी कोई स्थिति नहीं बनी थी, बल्कि बस इसकी अफवाह फैल गई।
हम शांति पसंद करने वाले लोग हैं। हमारा बिजनेस है और हम शांतिपूर्ण तरीके से रहना चाहते हैं। पूरे देश में ये अफवाह फैल गई कि धुबरी में साम्प्रदायिक दंगे हो गए, जबकि ऐसी कोई बात ही नहीं है।

‘यहां शांति कमेटी बन गई। यहां रैपिड एक्शन फोर्स, असम पुलिस, CRPF, पैरा मिलिट्री कमांडो वाहिनी मौजूद हैं। सब एकदम अच्छा चल रहा है।‘
दिलीप आगे कहते हैं, ‘लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अगर कोई गलत जानकारी हो तो वो पुलिस को बताएं, खुद कुछ करने की जरूरत नहीं है।
धुबरी के रहने वाले सोशल एक्टिविस्ट तौफीक अहमद भी लोगों से अफवाहों पर गौर न करने की अपील करते हैं। वे भी मानते हैं कि यहां का माहौल अफवाहों की वजह से बिगड़ा। वे कहते हैं, ‘धुबरी के लोग अब घबराएं नहीं। बस किसी गलत जानकारी या अफवाह पर ध्यान न दें। शांत रहें और संयम बरतें। अगर कोई दिक्कत आती है, तो तुरंत लोकल प्रशासन, पुलिस अधीक्षक (SP) या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से संपर्क करें।‘
घटना के बाद से लोगों में डर को लेकर वे कहते हैं कि अब हालात सामान्य हो रहे हैं। प्रशासन हमेशा हमारे लिए सतर्क रहा है।
150 से ज्यादा अरेस्ट, CM बोले- मंदिरों को नुकसान पहुंचाने वाला खास ग्रुप एक्टिव असम के CM हिमंत बिस्व सरमा 24 जून को फिर धुबरी पहुंचे। साम्प्रदायिक हिंसा के बाद CM का ये दूसरा दौरा रहा। यहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि अब तक हिंसा के आरोप में 150 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। CM ने कहा, ‘हिंसा के पीछे मुख्य साजिशकर्ता की पहचान कर ली गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में 11 लोग असम के बाहर के हैं, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।‘
कर्फ्यू को लेकर उन्होंने बताया कि रात के कर्फ्यू के दौरान गोली मारने का आदेश अब भी लागू है। इससे पहले 13 जून को भी CM हिमंत ने धुबरी का दौरा किया था। तब उन्होंने कहा था कि यहां एक खास ग्रुप हमारे मंदिरों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से एक्टिव हो गया है।‘
‘मंदिरों और पवित्र जगहों को अपवित्र करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी है। हमने जिले में देखते ही उन्हें गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। हम किसी भी कम्युनिटी के किसी भी वर्ग को इस तरह की गड़बड़ी करने की इजाजत नहीं दे सकते। हमारी सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और धुबरी को हमारे हाथ से जाने नहीं देगी।’
CM ने ‘नबीन बांग्ला’ नाम के एक संगठन पर धुबरी को बांग्लादेश में शामिल करने वाले भड़काऊ पोस्टर लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यहां एक नया गोमांस माफिया उभरा है। यहां पश्चिम बंगाल से हजारों मवेशी लाए गए हैं।
वहीं धुबरी जिला आयुक्त दिबाकर नाथ ने बताया था कि शहर में हालात फिलहाल काबू में हैं। हमने देखते ही गोली मारने का आदेश रद्द कर दिया है। दुकानें और बाजार खुल गए हैं। लोगों को डरने की जरूरत नहीं, प्रशासन उनके साथ है।
BJP: ये हिंदुओं को धुबरी से भगाने की कोशिश BJP ऐसी घटनाओं के जरिए हिंदुओं को डराने का आरोप लगाती है। असम BJP के चीफ प्रवक्ता किशोर उपाध्याय कहते हैं, ‘धुबरी में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। उन्हें भगाने के लिए डराने की कोशिश हो रही है। बीफ को वेपनाइज किया जा रहा है। ये पूरे देश में हो रहा है।’ वे कांग्रेस पर ऐसी घटनाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहते हैं, ‘असम कांग्रेस में लीडरशिप चेंज हुई है। उसके बाद से इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं।’
किशोर कथित बांग्लादेश समर्थन वाले पोस्टर लगाए जाने का भी जिक्र करते हैं। वे कहते हैं, ‘जो लोग बांग्लादेश के लिए सोचते हैं, जो इस्लामीकरण के बारे में सोचते हैं, उसके लिए जो भी कड़ा कदम होगा वो उठाया जाएगा। मुस्लिम देशों, पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश के सोशल मीडिया पर कांग्रेस को सपोर्ट किया जा रहा है।’

AUIDF: ये सब मुसलमानों को डराने की साजिश घटना वाला इलाका धुबरी विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के नजमुल हक विधायक हैं। हमने नजमुल हक से बात करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। फिर हमने AIUDF के वाइस प्रेसिडेंट अमीनुल हक से बात की। वे BJP पर धुबरी में अशांति फैलाने का आरोप लगाते हैं।
वे कहते हैं, ‘हमारे 6 विधायकों के दल ने 20 जून को धुबरी का दौरा किया है। यहां हालात अब भी सामान्य हैं और पहले भी ठीक थे। लोगों में जबरदस्ती का डर पैदा किया जा रहा है।‘
यहां BJP की पॉलिटिक्स का सबसे बड़ा कारण 2026 का चुनाव है। लोगों को बांग्लादेश का घुसपैठिया बनाकर जबरदस्ती पुश बैक कर रहे हैं।

घटना पर सवाल करने पर अमीनुल आरोप लगाते हुए कहते हैं, ‘धुबरी में मुसलमानों को डराने के लिए ये सब किया गया है। घटना वाली जगह गोमांस भी नहीं था। वहां बकरी का मीट था। खुद SP ने ये बताया है। CCTV कैमरे में दिखा कि उसे मंदिर के सामने एक हिंदू औरत ने रखा। ये लोग जो कहानी बना रहे हैं, वो पूरी क्रिएटेड है।‘
‘1992 के बाद से यहां हिंदू-मुस्लिम शांति से रह रहे हैं। यहां किसी ने एक-दूसरे को टच भी नहीं किया। फिर भी यहां आर्मी आ रही है। CRPF और BSF आ रही है।‘

कांग्रेस: BJP वाले खुद घटना में शामिल 2024 के लोकसभा चुनावों में सबसे बड़े अंतर से जीत धुबरी सीट पर ही हुई थी। यहां कांग्रेस उम्मीदवार रकीबुल हसन 10.25 लाख के सबसे ज्यादा अंतर से जीते थे। असम CM हिमंत ने कांग्रेस पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया है।
हिमंत ने सीधे राहुल गांधी का नाम लेकर कहा, ‘ये राहुल गांधी की जहरीली मानसिकता को दिखाता है। अगर कोई हिंदू मांस रखना चाहता है, तो वो सूअर का मांस रखेगा, गोमांस नहीं। ये राहुल गांधी की जहरीली मानसिकता है।‘
हमने CM के आरोपों को लेकर असम कांग्रेस मीडिया सेल के प्रभारी बेदब्रत बोरा से बात की। वे कहते हैं कि लखीमपुर के विधायक मानव डेका के घर पर जिन लोगों ने BJP जॉइन की, वे इस घटना में शामिल निकले। ये सब BJP का ही किया धरा है।

‘राहुल गांधी कहते हैं कि जो लोग मांस की पॉलिटिक्स करते हैं, गाय की पॉलिटिक्स करते हैं, वे असली हिंदू नहीं हैं।‘






