पिता ने फिल्मों में लाने से किया इनकार:तो घर छोड़ चले गए थे विजय, जाते वक्त छोड़ी चिट्ठी में लिखा था- उन्हें ढूंढा न जाए


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‘जना नायकन’ तमिल स्टार थलापति विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है, इसके बाद वे पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो जाएंगे। विजय ‘तमिलगा वेट्ट्री कझगम’ (TVK) के संस्थापक अध्यक्ष हैं। अगर उनकी पार्टी को अगले साले वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जीत मिलती है, तो वह राजनीति में पूरी तरह से एक्टिव हो सकते हैं।

 

तमिलगा वेट्री कजगम की स्थापना 2 फरवरी 2024 को विजय द्वारा की गई थी।

बता दें कि विजय ने 1992 में अपने पिता एस. ए. चंद्रशेखर की फिल्म नालैया थीरपू से बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया था। इससे पहले उन्होंने कुछ फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर भी काम किया था। 2015 की फिल्म पुली के बाद से उनकी कोई भी फिल्म फ्लॉप नहीं हुई। बीस्ट (2022), वारिसु (2023) और द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम (GOAT, 2024) जैसी फिल्मों को मिले-जुले रिव्यूज मिले, लेकिन कमाई अच्छी रही।

विजय के पिता एस. ए. चंद्रशेखर एक फिल्म निर्देशक हैं।

बाल कलाकार के रूप में 1984 में विजय ने एक्टिंग शुरू की विजय ने 1984 में फिल्म वेट्री में बाल कलाकार के रूप में फिल्मों काम करना शुरू किया था। फिल्म को उनके पिता चंद्रशेखर ने डायरेक्ट किया था। बाद में जब उन्होंने फिल्मों में हीरो बनने की इच्छा जताई, तो उनके पिता ने शुरुआत में मना कर दिया।

 

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स्टार विजय चैनल के शो ‘कॉफी विद अनु’ में विजय ने बताया था कि वे पढ़ाई में अच्छे नहीं थे और जीवन में कुछ करना चाहते थे। इसलिए बार-बार अपने पिता से फिल्मों में लाने की बात करते थे। जब पिता ने बार-बार इनकार किया, तो विजय नाराज होकर घर छोड़कर उधयम थिएटर चले गए। जाते वक्त उन्होंने एक चिट्ठी छोड़ दी कि उन्हें ढूंढा न जाए।

उनका प्लान था कि दो घंटे में फिल्म देखकर लौट आएंगे, लेकिन तभी उनके पिता को थिएटर में उनके होने की जानकारी मिल गई। वे थिएटर पहुंचे और विजय को घर ले आए।

 

विजय ने 60 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है।

 

पिता चाहते थे डॉक्टर बने विजय इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विजय के पिता ने भी यह किस्सा शेयर किया था। उनके अनुसार, विजय सुबह 10 बजे घर से निकले और शाम तक नहीं लौटे। बाद में उधयम थिएटर में उन्हें खोजा गया, जहां एक वॉचमैन ने बताया कि विजय फिल्म देख रहे हैं।

चंद्रशेखर ने यह भी बताया था कि वे चाहते थे कि विजय डॉक्टर बनें। खासकर इसलिए कि विजय की छोटी बहन, जो सिर्फ दो साल की थी, ब्लड कैंसर की वजह से गुजर गई थी। उस वक्त विजय सिर्फ दस साल के थे।

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