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काल भैरव अष्टमी 2025 इस साल मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के काल भैरव स्वरूप की विशेष पूजा, रात्रि जागरण और दीपदान करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन काले तिल से पूजा करने, सरसों के तेल का दीपक जलाने और कुत्तों को भोजन कराने से भय, शत्रु और दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालु इस व्रत को पूर्ण भक्ति भाव से करते हैं ताकि भैरव बाबा की कृपा से सुख-शांति और सुरक्षा बनी रहे।

काल भैरव जयंती, जिसे भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की आराधना का दिन है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने ब्रह्मांड की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए काल भैरव रूप धारण किया था। इस अवसर पर भक्त विशेष पूजा, रात्रि-जागरण, दीपदान और कथा-पाठ का आयोजन करते हैं। माना जाता है कि सरसों के तेल का दीपक जलाकर, काले तिल से पूजन करने और कुत्तों को भोजन कराने से भय, संकट और ग्रहदोषों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से शनि, राहु और केतु से पीड़ित लोगों के लिए भैरव साधना अत्यंत फलदायी मानी गई है। इस दिन की आराधना से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सुरक्षा, शांति और साहस की प्राप्ति होती है।






