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JEE Main 2026 Topper Shreyas Mishra Interview: जेईई मेन सेशन-1 में केवल 12 छात्रों को परसेंटाइल 100 मिली। AIR-1 हासिल करने वाले श्रेयस मिश्रा ने बताया कि एक गलती और एक अनसुलझा सवाल होने के बावजूद यह परिणाम उनके लिए आश्चर्यजनक था।
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JEE Main 2026 Topper Shreyas Mishra: सफलता और संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी
दिल्ली के श्रेयस मिश्रा ने जेईई मेन सेशन-1 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 परसेंटाइल हासिल किया और ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) प्राप्त की। इस उपलब्धि ने उन्हें खुद भी हैरान कर दिया, क्योंकि पेपर देने के बाद उन्होंने घर आकर क्वेश्चन पेपर चेक किया तो एक सवाल का उत्तर गलत था और एक सवाल उन्होंने पहले ही छोड़ दिया था। इसके बावजूद उन्हें सबसे ऊंचा स्कोर हासिल हुआ, जो उनके लिए जीवन का बड़ा सरप्राइज साबित हुआ।
श्रेयस ने अपनी तैयारी क्लास 11 से शुरू की, लेकिन उनका विषयों के प्रति जूनून और लगाव क्लास 6 से ही था। उन्हें विशेष रूप से मैथ्स और साइंस में गहरी रुचि थी। उन्होंने बताया कि क्लास 6-7 में ही उन्होंने एडवांस मैथ्स के टॉपिक्स पढ़ना शुरू कर दिया था। क्लास 9-10 में उन्होंने फिजिक्स और केमिस्ट्री के कुछ टॉपिक्स इतने पसंद किए कि उन्हें एक्सप्लोर करते-करते क्लास 11-12 के चैप्टर्स भी पढ़ लिए।
जेईई मेन की तैयारी के दौरान श्रेयस ने कोचिंग की मदद ली और मॉक टेस्ट तथा निरंतर प्रैक्टिस के जरिए अपनी तैयारी को मजबूत किया। उनका मानना है कि किसी भी टॉपिक को गहराई से समझना और उसकी एनालिटिकल और मैथमेटिकल साइड को एक्सप्लोर करना बेहद जरूरी है। NCERT की किताबों के साथ अन्य स्टडी मटीरियल का सही उपयोग और लगातार अभ्यास सफलता की कुंजी है।
श्रेयस ने समय प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताया, हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वह हमेशा इसमें सफल नहीं हो पाए। उन्होंने ब्रेक-ब्रेक लेकर पढ़ने और माइंड को शांत रखने की रणनीति अपनाई। क्लासिकल म्यूजिक सुनना उनकी पसंदीदा तकनीक है जिससे तनाव कम होता है।
सोशल मीडिया से दूरी बनाना और यूट्यूब को ब्लॉक करना भी उनकी तैयारी का अहम हिस्सा था। उन्होंने बताया कि क्लास 9-10 में उन्होंने समय वेस्ट किया था और अब सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाकर फोकस रखा है।
भविष्य के लिए श्रेयस का लक्ष्य जेईई एडवांस्ड में अच्छा प्रदर्शन करना और इंजीनियरिंग में करियर बनाना है। फिलहाल उनका ध्यान बोर्ड एग्जाम पर है। इंजीनियरिंग में उनकी रुचि इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस दोनों क्षेत्रों में है।
श्रेयस मिश्रा की कहानी साबित करती है कि सही दिशा में मेहनत, गहरी समझ, निरंतर अभ्यास और मानसिक संतुलन के साथ कोई भी छात्र कठिन परीक्षा में उत्कृष्ट परिणाम हासिल कर सकता है। उनका सफर जूनियर्स के लिए प्रेरणा है कि कठिन परिश्रम, स्मार्ट तैयारी और फोकस से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।






