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“सुप्रीम कोर्ट ने एक साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी को अस्थायी राहत दी है। आरोपी पर आरोप है कि उसने ऑनलाइन फ्रॉड से मिले पैसे जमा करने के लिए बैंक अकाउंट बनाए और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचा।”

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों के अधिकारों और सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह कमजोर और बुजुर्ग लोगों को जागरूक करे और उन्हें मुआवजा प्रदान करे, जिन्होंने ऑनलाइन फ्रॉड के कारण अपनी मेहनत की कमाई खो दी है।
सोमवार को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने परमजीत खरब नाम के आरोपी को जमानत दी। आरोपी पर आरोप है कि उसने ऑनलाइन फ्रॉड पीड़ितों से वसूले गए पैसे जमा करने के लिए बैंक अकाउंट बनाए और उन्हें कथित साइबर अपराधियों को बेच दिया।
कोर्ट ने खास तौर पर बुजुर्ग पीड़ितों की सुरक्षा और जागरूकता पर जोर दिया। जस्टिस नागरत्ना ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. डी. संजय से कहा कि सरकार को टीवी, रेडियो और अन्य माध्यमों के जरिए लोगों को शिक्षित करना चाहिए कि साइबर अपराधी कैसे काम करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि साइबर क्रिमिनल्स अधिकतर बुजुर्गों को टारगेट करते हैं और लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की मेहनत की कमाई उनसे छीनी जा रही है।
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ कानून लागू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम जनता को डिजिटल फ्रॉड के तरीकों के बारे में जागरूक करना और उन्हें सावधान करना भी जरूरी है।






