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गुलाब के पौधे को घना और भरपूर फूलों वाला बनाने के लिए सही पोषण बेहद जरूरी है। गार्डनिंग एक्सपर्ट गौरव श्रीवास्तव के अनुसार, घर पर आसानी से तैयार होने वाली एक खास जैविक खाद पौधे की तेजी से वृद्धि और अच्छी सेहत में मदद करती है। सरसों की खली, प्याज के छिलके और मीठे सोडे से तैयार यह मिश्रण सिर्फ 24 घंटे में बन जाता है और गुलाब के पौधे को मजबूत, हरा-भरा व अधिक फूल देने वाला बनाता है।
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सर्दियों और बसंत के मौसम में गुलाब के पौधों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। ठंडे मौसम में पौधों की वृद्धि धीमी हो जाती है, जबकि बसंत आते ही उनमें नई कोंपलें और कलियां निकलने लगती हैं। ऐसे समय में सही खाद देना बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मिलने वाले केमिकल फर्टिलाइजर की बजाय घर पर तैयार की गई ऑर्गेनिक खाद ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी होती है।
गार्डनिंग एक्सपर्ट गौरव श्रीवास्तव के अनुसार, किचन में आसानी से उपलब्ध चीजों से एक शक्तिशाली जैविक घोल तैयार किया जा सकता है, जो गुलाब की जड़ों को मजबूती देता है, पौधे की रुकी हुई ग्रोथ को तेज करता है और अधिक व बड़े फूल खिलाने में मदद करता है। इस खाद में सरसों की खली, प्याज के छिलके और मीठा सोडा मुख्य सामग्री के रूप में इस्तेमाल होते हैं।
खाद बनाने के लिए सबसे पहले एक साफ प्लास्टिक या कांच का कंटेनर लें और उसमें लगभग 850 मि.ली. सामान्य तापमान का पानी डालें। बहुत ठंडा या गर्म पानी उपयोग न करें, क्योंकि सही तापमान फर्मेंटेशन प्रक्रिया के लिए जरूरी होता है। इसके बाद 150 मि.ली. सरसों की खली का घोल इसमें मिलाएं। सरसों की खली को पौधों के लिए ‘सुपरफूड’ माना जाता है, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पौधे की जड़ों को मजबूत बनाता है और तनों को मोटा करने में मदद करता है।
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अब इसमें एक मुट्ठी प्याज के छिलके डालें। प्याज के छिलकों में पोटेशियम और आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जो फूलों के रंग को गहरा और आकर्षक बनाती है। साथ ही यह सूक्ष्म पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुलकर पौधे को लंबे समय तक पोषण देते हैं। इसके बाद मिश्रण में चौथाई चम्मच मीठा सोडा मिलाएं। मीठा सोडा एंटी-फंगल गुणों से भरपूर होता है, जो मिट्टी के pH स्तर को संतुलित रखने और फफूंद जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करता है।
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सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर कंटेनर को ढक दें और इसे किसी छायादार स्थान पर 24 घंटे के लिए रख दें। इस दौरान फर्मेंटेशन की प्रक्रिया होती है, जिससे सभी पोषक तत्व आपस में मिलकर एक असरदार जैविक अर्क तैयार करते हैं। 24 घंटे बाद घोल का रंग बदल जाएगा, जो इसके तैयार होने का संकेत है।
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ध्यान रखें कि इस गाढ़े घोल को सीधे पौधे में न डालें। उपयोग करने से पहले इसमें डेढ़ से दो गुना सादा पानी मिलाकर इसे पतला करें। इसके बाद गुलाब के पौधे की जड़ों के आसपास हल्की गुड़ाई करें और तैयार घोल को धीरे-धीरे मिट्टी में डालें, ताकि पोषण गहराई तक पहुंच सके। नियमित अंतराल पर इस खाद का इस्तेमाल करने से गुलाब का पौधा हरा-भरा, मजबूत और फूलों से लदा हुआ नजर आएगा।






