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भारत ने रूस से तेल आयात को लेकर अपना स्पष्ट रुख पेश किया है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, भारत की ऊर्जा आयात नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। इसका मतलब है कि जनता को सही दाम पर पर्याप्त ऊर्जा मिले और देश की सप्लाई लाइन सुरक्षित बनी रहे।
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भारत तेल और गैस के मामले में एक बड़ा आयातक देश है, इसलिए इसकी ऊर्जा नीति बेहद संवेदनशील और रणनीतिक है। रूस से तेल खरीद को लेकर हालिया वैश्विक और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत ने यह सुनिश्चित किया है कि उसके उपभोक्ताओं को अनिश्चितता या संकट का सामना न करना पड़े।
इस नीति के तहत भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और उपभोक्ताओं के लिए वाजिब दाम दोनों को ध्यान में रख रहा है। इसका मतलब है कि भारत न सिर्फ अपने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव से देश के लोगों को बचाने की रणनीति भी अपना रहा है। 🇮🇳🛢️🌏
नई दिल्ली: भारत ने अपनी ऊर्जा आयात नीति को लेकर स्पष्ट रुख रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि देश का लक्ष्य है कि भारतीय उपभोक्ताओं को पर्याप्त ऊर्जा मिले, सही दाम पर और सप्लाई सुरक्षित रहे। 🌟
मिस्री ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत रूसी तेल का आयात “सीधे या परोक्ष रूप से बंद करने के लिए प्रतिबद्ध” है। इसके बाद भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील का नया फ्रेमवर्क घोषित किया, जिसमें रूसी तेल पर लगे 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया। ✍️📈
विदेश सचिव ने बताया कि भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था है और 80-85% ऊर्जा आयात पर निर्भर होने के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतें सीधे उपभोक्ताओं पर असर डालती हैं। इसलिए नीति की पहली प्राथमिकता हमेशा भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है। 💡⚡
भारत सिर्फ बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता ही नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इसलिए देश विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात करता है और अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखता है।
नीति की मुख्य बातें:
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उपभोक्ताओं को उचित मूल्य और पर्याप्त ऊर्जा सुनिश्चित करना 💼
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किसी एक स्रोत पर निर्भर न रहना, विविधता बनाए रखना 🌏
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राष्ट्रीय हित के आधार पर निर्णय लेना और सप्लाई सुरक्षित रखना 🛢️
पिछले हफ्ते ट्रंप ने भारत की रूस से तेल खरीद पर लगे 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाया, जिससे भारत को ऊर्जा सुरक्षा और बाजार विविधता बनाए रखने में मदद मिली। 🔥
इस बीच, पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता के चलते जनवरी में भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट देखी गई।






