भारत की सैन्य शक्ति में एक साथ बड़ा इजाफा होने जा रहा है। जल्द ही भारतीय सेना को अमेरिका से तीन अतिरिक्त अपाचे AH-64 अटैक हेलीकॉप्टर मिलने वाले हैं, जिससे जमीनी युद्ध क्षमता और मजबूत होगी। वहीं, समुद्री मोर्चे पर भारतीय नौसेना इस सप्ताह अपने दूसरे MH-60R सीहॉक पनडुब्बी रोधी हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन की शुरुआत करने जा रही है, जो समुद्री निगरानी और सुरक्षा को नई धार देगा।
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को और तेज़ कर दिया है। हाल के महीनों में किए गए बड़े रक्षा सौदों ने न सिर्फ देश की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है, बल्कि पाकिस्तान और चीन की रणनीतिक चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। अब भारत की ताकत हवा से लेकर समुद्र तक साफ तौर पर बढ़ती नजर आ रही है। इसी कड़ी में भारतीय वायु सेना को अमेरिका से तीन और अत्याधुनिक अपाचे AH-64 अटैक हेलीकॉप्टर मिलने वाले हैं, जबकि भारतीय नौसेना इस सप्ताह MH-60R सीहॉक पनडुब्बी-रोधी हेलीकॉप्टरों के अपने दूसरे स्क्वाड्रन की शुरुआत करने जा रही है।
अपाचे और सीहॉक जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारतीय सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी। जहां अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर दुश्मन के टैंकों और जमीनी ठिकानों के खिलाफ वायु शक्ति को नई धार देंगे, वहीं सीहॉक हेलीकॉप्टर हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों, समुद्री निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करेंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की मल्टी-डोमेन वॉरफेयर रणनीति को और प्रभावी बनाएगा।
इसके साथ ही भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना और वायु सेना को 2028 से स्वदेशी ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर मिलने शुरू होंगे, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बड़ा बल मिलेगा। आने वाले 10 से 15 वर्षों में सेना को एक हजार से अधिक नए हेलीकॉप्टरों की जरूरत बताई जा रही है, ताकि पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा सके। कुल मिलाकर, अपाचे, सीहॉक और स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की यह तैनाती भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।