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भारत साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टी20 में 214 रनों का बड़ा लक्ष्य चेज करने में नाकाम रहा। टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया, जो अंत में भारी पड़ गया और मैच का रूख शुरुआती चरण में ही साउथ अफ्रीका की ओर झुक गया।
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मुल्लांपुर के महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने भारत को 51 रन से हराकर निर्णायक जीत दर्ज की। इस मैच में साउथ अफ्रीकी सलामी बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक ने धमाकेदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 46 गेंदों में 7 छक्कों और 5 चौकों की मदद से 90 रन बनाए और टीम को 213 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। उनकी इस आतिशी पारी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।
भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला लिया, लेकिन यह निर्णय बाद में टीम के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। दक्षिण अफ्रीका ने शुरुआत में थोड़ी धीमी पिच के बावजूद बड़े शॉट लगाए और पारी आगे बढ़ने के साथ रन गति तेज होती चली गई। दूसरी ओर जब भारतीय टीम बल्लेबाजी करने उतरी तो परिस्थितियाँ बिल्कुल बदल चुकी थीं। मैच के बाद डी कॉक ने भी माना कि भारतीय बल्लेबाजों ने अधिक कठिन पिच का सामना किया। उन्होंने कहा कि जब वे बल्लेबाजी कर रहे थे, तब गेंद अपेक्षाकृत धीमी थी और कम मूव हो रही थी, लेकिन भारतीय पारी के दौरान गेंद में अचानक अतिरिक्त गति और मूवमेंट आने लगी, जिसने चेज को और मुश्किल बना दिया।
भारतीय टीम 213 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए कभी भी मैच में पूरी तरह सेट नहीं दिखी और लगातार विकेट गिरने से दबाव बढ़ता चला गया। अंत में भारतीय पारी आखिरी ओवर में 162 रनों पर सिमट गई और टीम को 51 रनों की हार का सामना करना पड़ा।
इस हार की एक बड़ी वजह मुल्लांपुर स्टेडियम की रात में बदलती पिच स्थिति भी रही। इस मैदान का रिकॉर्ड पहले से ही बताता है कि नाइट मैचों में लक्ष्य का पीछा करना बेहद कठिन होता है। आईपीएल 2025 में यहां खेले गए 5 रात के मैचों में सिर्फ एक बार दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम जीत पाई। दूसरी पारी में तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त सहायता मिलती है, गेंद तेजी से पकड़ बनाती है और बल्लेबाजी और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इस वजह से टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला टीम इंडिया के लिए मैच की शुरुआत में ही एक रणनीतिक गलती साबित हुआ।
कुल मिलाकर, पिच का बदलता व्यवहार, टॉस के समय लिया गया गलत निर्णय, और क्विंटन डी कॉक की यादगार पारी भारत की हार के प्रमुख कारण रहे।






