ECG भी नहीं पकड़ पाती दिल की 1 बीमारी, हार्ट अटैक नहीं नाम, मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. अभिषेक ने बताए 5 लक्षण


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दिल की बीमारी साइलेंट किलर होती हैं, क्योंकि उनके बारे में पता नहीं चल पाता है। लेकिन एक बीमारी ऐसी भी है, जिसे ईसीजी जैसा टेस्ट भी नहीं पकड़ पाता है। इसका नाम कार्डियोमायोपैथी है, जिसके लक्षण मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टर ने बताए हैं।

heart disease in ECG
कार्डियोमायोपैथी एक गंभीर कार्डिएक समस्या है, जिसका अक्सर पता नहीं चल पाता। यह हार्ट मसल्स की बीमारी है, जो चुपचाप बढ़ती चली जाती है। जब यह बीमारी अचानक से सामने आती है, तो मरीजों को बहुत हैरानी होती है। इसके पीछे का कारण डॉक्टर ने बताया।

डॉ. अभिषेक सिंह, कंसल्टैंट – कार्डियोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल, गाजियाबाद ने बताया कि इस बीमारी की शुरुआत में मरीजों की ईसीजी भी अक्सर नॉर्मल आती है। इसके लक्षण आम समस्याएं बनकर छिपे रहते हैं। इसलिए इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि ईसीजी की रीडिंग सामान्य आने पर भी दिल बीमार हो सकता है।

कार्डियोमायोपैथी क्या है?

कार्डियोमायोपैथी क्या है?

जब हृदय का मसल्स स्ट्रक्चर और फंक्शन में बदलाव होता है, तो इसकी खून पंप करने की क्षमता कम हो जाती है, जिसे कार्डियोमायोपैथी कहते हैं। शुरुआत में यह बीमारी मामूली रूप में होती है, इसलिए सामान्य जांच में कुछ नहीं पता चलता। ईसीजी दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को सामान्य दिखाता है, क्योंकि कार्डियोमायोपैथी की शुरुआत में इलेक्ट्रिकल सिग्नल सामान्य होते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

किन लक्षणों पर नजर रखें?

किन लक्षणों पर नजर रखें?

कार्डियोमायोपैथी के लक्षण चिंता, तनाव एसिडिटी, या डिकंडीशनिंग के समान होते हैं, जिसकी वजह से हृदय की गंभीर समस्याएं डॉक्टर और मरीज, दोनों की ही नजर में नहीं आती हैं। जैसे

  • थकान
  • चक्कर
  • सांस फूलना
  • छाती में बेचैनी
  • घबराहट

 

 

इसके कारण क्या हैं?

इसके कारण क्या हैं?

कार्डियोमायोपैथी के ज्यादातर मामले अनुवांशिक होते हैं। लेकिन लंबे समय तक हाइपरटेंशन रहने, अत्यधिक शराब पीने, वायरल इंफेक्शन या मेटाबोलिक डिसऑर्डर के कारण भी यह हो सकता है। इनकी वजह से मायोकार्डियम चुपचाप डैमेज होता चला जाता है और सालों बाद इसके लक्षण दिखते हैं।

 

 

 

 

 

 

इसका निदान कैसे होता है?

इसका निदान कैसे होता है?

कार्डियोमायोपैथी का पता करना काफी जटिल और बहुस्तरीय होता है, क्योंकि यह रोग सामान्य ईसीजी में सामने नहीं आता है। इसलिए निम्नलिखित टेस्ट करवाए जाते हैं।

  • ईकोकार्डियोग्राम (ईको)
  • एमआरआई
  • खून की जांच और तनाव परीक्षण

कैसे होता है इलाज?

कैसे होता है इलाज?

पता करने के बाद बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए इलाज शुरू किया जाता है, ताकि जोखिम ना बढ़े और दिल को फेल होने या फिर एरिद्मिया से बचाया जा सके। इससे लक्षणों से आराम मिलता है और कार्डिएक फंक्शन में सुधार आता है तथा हृदय की मांसपेशियों की रक्षा होती है। लेकिन अगर बीमारी बढ़ चुकी है, तो डिवाईस-आधारित थेरेपी दी जाती है। हार्ट फेल होने के कारण अचानक मृत्यु होने की संभावना को रोका जा सके, इसके लिए आईसीडी-इंप्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर या सीआरटी की मदद ली जाती है, जो हृदय की धड़कनों में तालमेल बनाते हैं। कुछ मरीजों के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

सर्जरी के ऑप्शन

सर्जरी के ऑप्शन
  • सेप्टल मायेक्टोमी
  • एलवीएडी (लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाईस)
  • हार्ट ट्रांसप्लांट

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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