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अमेरिका में पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनावों के दौरान एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप का मजबूती से समर्थन किया था और उनके कैंपेन के लिए भारी आर्थिक मदद भी दी थी। लेकिन अब हालत बदलते दिख रहे हैं। मस्क ने हालिया बयानों और फैसलों से यह संकेत दे दिया है कि वे ट्रंप प्रशासन की नीतियों और कदमों के साथ अब पहले जैसी सहमति नहीं रखते। इससे यह साफ है कि उनकी राजनीतिक प्राथमिकताएँ धीरे-धीरे नई दिशा ले रही हैं।
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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन जहां H-1B वीजा को लेकर सख्त नीतियाँ अपनाता दिख रहा है — जिसमें वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी और नियमों का कठोर होना शामिल है — वहीं दूसरी ओर एलन मस्क ने इसके उलट रुख पेश किया है। उन्होंने भारतीय पेशेवरों की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि भारत से जाने वाले प्रतिभाशाली लोग अमेरिका की तकनीक, नवाचार और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मस्क के अनुसार, H-1B वीजा को रोकने की बजाय इसमें मौजूद खामियों को दूर करना चाहिए क्योंकि वैश्विक प्रतिभा के बिना अमेरिका की कंपनियों को सही कौशल वाले लोगों की कमी का सामना करना पड़ता है।
एक पॉडकास्ट के दौरान मस्क ने इस बात पर जोर दिया कि H-1B प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों के लिए विशेष भूमिकाएँ भरने का एक अनिवार्य माध्यम रहा है और इसे बंद करना समझदारी नहीं होगी। हालांकि उन्होंने आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा होने वाले दुरुपयोग को स्वीकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि समाधान प्रोग्राम को समाप्त करना नहीं बल्कि उसमें सुधार करना है।
2024 में जारी हुए H-1B वीज़ा में 71% भारतीयों का हिस्सा रहा है, जिसके चलते भारतीय पेशेवरों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है। वहीं ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस वीजा के कारण स्थानीय अमेरिकी नौकरियाँ विदेशियों को चली जाती हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञों और अब एलन मस्क जैसे बड़े उद्यमियों का मानना है कि विदेशी प्रतिभा के बिना अमेरिका की तकनीकी सेक्टर को भारी नुकसान होगा और देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकता है।






