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भारतीय सेना की पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के बाद, पाकिस्तान ने जवाबी प्रहार की कोशिश में उरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को निशाना बनाया। सीमा पार से तेज गोलाबारी और ड्रोन हमले के बीच, सीआरपीएफ के जवानों ने जबरदस्त बहादुरी दिखाते हुए हमले को विफल किया। खतरे के बावजूद जवानों ने मोर्चा संभाला और मौके पर मौजूद करीब 250 नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर बड़ा नुकसान टलने से बचाया।
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भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में जम्मू-कश्मीर के उरी क्षेत्र में एलओसी के पास स्थित हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट को निशाना बनाने की कोशिश की। 6–7 मई 2025 की रात पाकिस्तान की ओर से की गई अंधाधुंध गोलीबारी, मोर्टार शेलिंग और ड्रोन गतिविधि के बीच प्लांट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ/सीआरपीएफ कर्मियों ने असाधारण बहादुरी और सतर्कता का परिचय दिया। दुश्मन की कोशिश थी कि हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट को नुकसान पहुँचाकर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक ढांचे पर असर डाला जाए, लेकिन जांबाज जवानों ने मौके पर तुरंत मोर्चा संभालकर ड्रोन हमलों को निष्क्रिय कर दिया और प्लांट को किसी बड़े नुकसान से बचा लिया।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पाकिस्तानी सेना की भारी गोलाबारी आसपास की बस्तियों तक पहुंचने लगी। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में कमांडेंट रवि यादव के नेतृत्व में जवानों ने न सिर्फ महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि स्थानीय लोगों की जान बचाने को प्राथमिकता देते हुए घर-घर जाकर करीब 250 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। गोलाबारी रुक-रुक कर जारी थी, लेकिन जवान लगातार इलाके में गश्त करते रहे ताकि कोई भी नागरिक पीछे न रह जाए।
सीआरपीएफ/सीआईएसएफ की यह त्वरित और साहसिक कार्रवाई इस पूरे ऑपरेशन की सफलता का प्रमुख कारण बनी। पाकिस्तान की ओर से हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को निशाना बनाने का प्रयास पूरी तरह विफल हो गया। इस अभूतपूर्व वीरता के सम्मान में मंगलवार को नई दिल्ली स्थित सीआईएसएफ मुख्यालय में 19 कर्मियों को डीजी डिस्क से सम्मानित किया गया। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना का पहला लक्ष्य उरी का हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट था, लेकिन भारतीय सुरक्षाबलों की दृढ़ता और पेशेवर कार्रवाई ने उसकी हर कोशिश को नाकाम कर दिया।






