“शताब्दी एक्सप्रेस में TTE का स्टाइल हुआ वायरल, महिला बोली– ऐसा टिकट चेकर रोज़ मिल जाए!”


Loading

यूपी और उत्तराखंड के तेंदुओं की हालत बिगड़ती जा रही है। गलत खानपान, कम शिकार और सीमित गतिविधियों के कारण उनका वजन बढ़ रहा है, दांत कमजोर हो रहे हैं और उनमें सुस्ती भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कई तेंदुए अब जंगल की प्राकृतिक जीवनशैली में लौटने लायक भी नहीं बचे हैं।

Lazy Leopards

यूपी और उत्तराखंड के कई इलाकों में तेंदुओं का व्यवहार तेजी से बदल रहा है। जंगलों के बजाय अब ये शिकारी गन्ने के खेतों को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। आसान भोजन, इंसानी और पालतू जानवरों पर बिना मेहनत किए हमला करने के मौके, और खेतों में सुरक्षित छिपे रहने की सुविधा ने इन्हें जंगल की तुलना में खेतों का जीवन ज्यादा रास आने लगा है। यही वजह है कि वन विभाग के अनुसार कई तेंदुए इतने ‘नाजुक’ और कमज़ोर हो चुके हैं कि वे अब जंगल में वापस जाकर शिकार ही नहीं कर सकते।

वाइल्डलाइफ टीमों ने जब इन तेंदुओं को पकड़ा और उनके स्वास्थ्य की जांच की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—कई तेंदुओं का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ चुका है, उनके पंजे कुंद हो गए हैं, दांत घिस चुके हैं और उनकी चुस्ती-फुर्ती भी कम हो गई है। यानी, जंगल के असली शिकारी अब खेतों की आरामदायक जिंदगी के चलते शिकार करने लायक नहीं बचे।

बीते चार वर्षों में बिजनौर में पकड़े गए 92 तेंदुओं में से 40 को जंगल में छोड़ा ही नहीं गया, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना था कि वे जंगल के लिए फिट नहीं बचे। वहीं रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए कई तेंदुए 30–35 किलोमीटर चलने के बाद फिर से गन्ने के खेतों में लौट आए, जिससे साफ है कि वे खेतों को ही अपना स्थायी आवास मानने लगे हैं।

गन्ने के खेत इनके लिए मोटा और सुरक्षित आश्रय बन चुके हैं। वहीं, बाघों की बढ़ती आबादी ने भी तेंदुओं को जंगलों से बाहर धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है। राजाजी और अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने से तेंदुए खेतों की ओर बढ़े, जहां उन्हें इंसानों और पालतू जानवरों का आसान शिकार मिलने लगा।

इस बदलाव का एक गंभीर परिणाम इंसानों पर हमले बढ़ना भी है। बिजनौर में जनवरी 2023 से अब तक तेंदुओं के हमलों में 35 लोगों की मौत हो चुकी है—कई मामलों में गांव वालों पर उनके घर के बिल्कुल पास ही हमला हुआ। वन विभाग के अनुसार यह स्थिति इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव और बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों का स्पष्ट संकेत देती है।

अब वन अधिकारी इस चुनौती से निपटने के लिए इन तेंदुओं को चिड़ियाघरों में भेजने या विशेष संरक्षण केंद्रों में रखने जैसे विकल्पों पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि कई तेंदुए अब पूरी तरह जंगल में अपना जीवन नहीं बिता सकते।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!
नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9653865111 हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर