आपके ऑफिस में भी हैं खतरनाक केमिकल्स, Dr. की चेतावनी-हो सकता है Pancreatic cancer, 6 काम बचाएंगे जान


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ऑफिस में केमिकल एक्सपोज़र बहुत अधिक नहीं होता, लेकिन यह आम और लगातार होता है। पैनक्रियाटिक कैंसर से इसका संबंध हल्का है, फिर भी यह इतना महत्वपूर्ण है कि हम अपने ऑफिस की हवा और आदतों पर ध्यान दें।

cancer causes
Photo-Istock
अक्सर लोगों का मानना होता है कि केमिकल्स का खतरा सिर्फ बड़ी फैक्ट्रियों में काम करने वालों को होता है, लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। आज के मॉडर्न ऑफिस और घरों में भी कई तरह के हानिकारक केमिकल धीरे-धीरे हवा में मिलते रहते हैं। इनकी मात्रा भले ही बहुत कम हो, लेकिन रोजाना और लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

शोध बताते हैं कि कुछ खास केमिकल्स का लगातार एक्सपोज़र पैन्क्रिएटिक कैंसर जैसे गंभीर रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। यह वही बीमारी है जिसका समय पर पता लगाना काफी मुश्किल होता है।

डॉक्टर जेहान बोमन धाभार, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार, लोग सोचते हैं कि एयर-कंडीशन वाला ऑफिस बिल्कुल सुरक्षित होता है लेकिन फर्नीचर, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, एयर फ्रेशनर और प्रिंटर जैसी रोजमर्रा की चीजें भी धीरे-धीरे केमिकल हवा में छोड़ती रहती हैं जिनका असर शरीर पर पड़ सकता है

मॉडर्न ऑफिस भी नहीं केमिकल-फ्री

मॉडर्न ऑफिस भी नहीं केमिकल-फ्री

ऑफिस में जाते ही आपको नई कुर्सियों की खुशबू, फर्श की सफाई की तीखी गंध, रूम फ्रेशनर, प्रिंटर की महक या AC की ठंडी हवा महसूस होती है। ये सभी वस्तुएं कुछ मात्रा में केमिकल छोड़ती हैं। थोड़े समय के लिए ये नुकसान नहीं करतीं, लेकिन सालों तक रोज़ाना इनसे सामना होने पर खतरा बढ़ सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ऑफिस में पाए जाने वाले आम केमिकल

ऑफिस में पाए जाने वाले आम केमिकल

ऑफिस में VOCs, बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड, प्रिंटर से निकलने वाले फाइन पार्टिकल्स और प्लास्टिक में पाए जाने वाले फैलेट्स जैसे केमिकल ऑफिस की कुर्सियों, फर्नीचर, क्लीनिंग लिक्विड, फ्रेशनर और मशीनों से निकलते हैं। ये तुरंत नुकसान नहीं करते, लेकिन सालों तक रोजाना इनके संपर्क में रहने से शरीर में सूजन और सेल स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिससे कुछ तरह के कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है।

केमिकल शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं?

केमिकल शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं?

पैन्क्रिएटिक कैंसर देर से पता चलता है, इसलिए इसके छोटे जोखिम भी समझना जरूरी है। ऑफिस में मौजूद VOCs और फॉर्मेल्डिहाइड से लगातार सूजन हो सकती है, जबकि प्लास्टिक में मिलने वाले फैलेट्स हार्मोनल गड़बड़ी, मोटापा और डायबिटीज बढ़ा सकते हैं। प्रिंटर-कॉपियर से निकलने वाले कण खराब इंडोर एयर क्वालिटी का कारण बनते हैं और एसी की बंद हवा इन्हें कमरे में फंसा देती है। असल जोखिम किसी एक केमिकल से नहीं बल्कि कई केमिकल्स के रोजाना मिलकर होने वाले मिक्सचर इफेक्ट से बढ़ता है।

रिसर्च क्या कहती है?

रिसर्च क्या कहती है?

दुनिया भर की रिसर्च बताती है कि अगर ऑफिस में VOCs ज्यादा होते हैं तो लोगों में इंफ्लेमेशन बढ़ सकता है और खराब इंडोर एयर क्वालिटी वाले कर्मचारियों में मेटाबॉलिक दिक्कतें अधिक देखी जाती हैं। लंबे समय तक हल्के केमिकल एक्सपोज़र वाले लोगों में पैनक्रियाटिक कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है, खासकर तब जब मोटापा, तनाव, धूम्रपान या डायबिटीज जैसी समस्याएं भी हों। हालांकि यह खतरा बहुत बड़ा नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

जिन लोगों का ऑफिस खराब वेंटिलेशन वाला होता है या जो प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीनों के पास लगातार काम करते हैं, उन्हें इन केमिकल्स के लंबे समय तक असर का ज्यादा खतरा रहता है। वहीं डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान की आदत या परिवार में कैंसर का इतिहास होने पर जोखिम और बढ़ सकता है।

ऑफिस में अपनाए जाने वाले आसान उपाय

ऑफिस में अपनाए जाने वाले आसान उपाय

डॉक्टर ने बताया कि 15-20 मिनट खिड़की खोलकर वेंटिलेशन बढ़ाएं ताकि कमरे की दूषित हवा बाहर निकल सके।
पेंट, फर्नीचर और क्लीनिंग के लिए हमेशा लो-VOC प्रोडक्ट्स चुनें।
प्रिंटर और फोटोकॉपी मशीन को डेस्क से दूर किसी अलग और हवादार जगह पर रखें।
तेज खुशबू वाले एयर फ्रेशनर से बचें और बिना सुगंध वाले क्लीनिंग प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करें।
एसी वाले कमरे में ज्यादा देर बैठने के बजाय दिन में कुछ मिनट बाहर जाकर फ्रेस हवा लें।
ऑफिस में एरेका पाम, स्पाइडर प्लांट और पीस लिली जैसे इनडोर पौधे लगाएं, जो हवा में मौजूद हानिकारक केमिकल्स को नैचुरली कम करते हैं और माहौल भी सुखद बनाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।

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