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जेपी ग्रुप की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की दौड़ में बड़ा मोड़ आया है। अनिल अग्रवाल की वेदांता द्वारा अधिक बोली लगाने के बावजूद, कर्जदाताओं ने सर्वसम्मति से गौतम अडानी की अडानी एंटरप्राइजेज के प्रस्ताव को ज्यादा भरोसेमंद और व्यवहारिक माना है। इसी वजह से क्रेडिटर्स ने अडानी ग्रुप के ऑफर के पक्ष में मतदान किया। अब संभावना है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स भी जल्द ही अडानी समूह की झोली में शामिल हो जाए, जिससे समूह का इन्फ्रास्ट्रक्चर और सीमेंट सेक्टर में दबदबा और बढ़ सकता है।
दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही देश की दिग्गज इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) को लेकर बड़ा मोड़ सामने आया है। लंबे समय से कर्ज में डूबी इस कंपनी के लिए अडानी एंटरप्राइजेज और वेदांता समेत कई शीर्ष कॉरपोरेट दिग्गजों ने बोली लगाई थी, लेकिन सबसे बड़ी बोली देने के बावजूद वेदांता को पीछे छोड़ते हुए कर्जदाताओं ने सर्वसम्मति से अडानी समूह के प्रस्ताव को चुना है। यह फैसला इसलिए भी चौंकाता है क्योंकि वेदांता की ओर से करीब ₹17,000 करोड़ की सबसे ऊंची बोली लगाई गई थी, जबकि अडानी की पेशकश नेट प्रेजेंट वैल्यू के आधार पर करीब ₹500 करोड़ कम बैठती थी।
इसके बावजूद अडानी एंटरप्राइजेज को बढ़त इसलिए मिली क्योंकि उनकी बोली में बेहतर अग्रिम भुगतान (upfront payment), अधिक पारदर्शी प्रीपेमेंट शर्तें और कर्जदाताओं को त्वरित रिकवरी दिलाने का अधिक मजबूत मॉडल शामिल था। क्रेडिटर्स समिति ने स्कोरिंग के लिए एक विशेष शीट तैयार की थी, जिसमें अडानी ग्रुप को सबसे ज्यादा अंक मिले और उनकी पेशकश को 100 में से सर्वाधिक स्कोर दिया गया। हालांकि, कुछ कर्जदाताओं ने इस स्कोरिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल भी उठाए हैं।
कंपनी पर कुल ₹55,000 करोड़ का कर्ज है और नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) इसका सबसे बड़ा क्रेडिटर है। पिछले वर्ष जेपी एसोसिएट्स को आधिकारिक रूप से इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में स्वीकार किया गया था और Deloitte से संबद्ध रेजोल्यूशन प्रोफेशनल भुवन मदान इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं, हालांकि उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
बोलियों की शुरुआत में अडानी और वेदांता के अलावा डालमिया भारत, जिंदल पावर, और PNC इन्फ्राटेक ने भी दिलचस्पी दिखाई थी। डालमिया भारत ने शुरुआती दौर में सबसे बड़ी बोली दी थी, लेकिन उसकी पेशकश में कई शर्तें होने के कारण उसने बाद की ई-नीलामी में हिस्सा नहीं लिया।
जेपी ग्रुप के प्रमोटर मनोज गौड़ ने भी कंपनी को दिवालिया होने से बचाने के लिए करीब ₹18,000 करोड़ की सेटलमेंट ऑफर दी थी, लेकिन कर्जदाताओं को यह प्रस्ताव वित्तीय रूप से पर्याप्त मजबूत नहीं लगा।
जेपी एसोसिएट्स के पास सीमेंट, पावर, इंजीनियरिंग, हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। ग्रेटर नोएडा में फैला इसका मशहूर स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट ही 1,000 हेक्टेयर से अधिक में फैला हुआ है, जिसे लेकर भी उद्योग जगत में काफी उत्सुकता है।
अब जबकि कर्जदाताओं ने अडानी एंटरप्राइजेज को चुना है, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है, क्योंकि वेदांता ने उच्चतम बोली लगाई थी। इसके बावजूद, परंपरागत रूप से अदालतें कर्जदाताओं के सामूहिक व्यावसायिक निर्णय का सम्मान करती हैं, इसलिए अंतिम निर्णय इसी वोटिंग के अनुरूप रहने की उम्मीद जताई जा रही है।






