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आईपीएस पंकज चौधरी 2009 बैच के राजस्थान कैडर के सख्त और बेबाक अधिकारी माने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर एक नया प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। उनकी याचिका के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर वह चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। यहां पढ़ें पंकज चौधरी से जुड़ी पूरी जानकारी और विवाद की पृष्ठभूमि।
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राजस्थान कैडर के 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वर्तमान में वे पुलिस अधीक्षक एवं कम्युनिटी पुलिसिंग के नोडल अधिकारी के तौर पर तैनात हैं, लेकिन हाल ही में राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ दायर की गई उनकी याचिका ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सीधे और बेबाक तेवर दिखाने के लिए पहचाने जाने वाले चौधरी का सरकारी व्यवस्था से टकराव का इतिहास काफी पुराना है।
जैसलमेर में पाकिस्तानी जासूस शकूर खान के मामले ने पहली बार पंकज चौधरी को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था। जांच के दौरान चौधरी ने कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद के घर पाक संबंधी गतिविधियों का संदेह जताया था, जिसके बाद उन्होंने गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलने जैसा बड़ा कदम उठाया। इस कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में तूफान मचा दिया और उन्हें एसपी जैसलमेर के पद से हटना पड़ा।
चौधरी का करियर कई विवादित फैसलों, राजनीतिक दबावों और विभागीय कार्रवाईयों के बीच आगे बढ़ता रहा है। उन पर कई बार चार्जशीट दायर हुई, यहां तक कि एक बार बर्खास्तगी तक का आदेश जारी कर दिया गया, जिसे उन्होंने कोर्ट में चुनौती देकर रद्द करवाया। हाल ही में 12 फरवरी 2025 को कार्मिक विभाग द्वारा जारी किए गए डिमोशन आदेश ने एक बार फिर उन्हें विवादों के केंद्र में ला दिया। माना जाता है कि उनकी पहली पत्नी से जुड़े मामले और पारिवारिक विवाद भी इस कार्रवाई का कारण बने।
पंकज चौधरी का राजनीतिक झुकाव भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। 2019 में वे सेवा से बाहर रहते हुए बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे, हालांकि उनका नामांकन निरस्त हो गया। वहीं उनकी पत्नी मुकुल चौधरी ने जोधपुर सीट से चुनाव लड़ा और बाद में भाजपा में सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाने लगीं। माना जाता है कि आरएसएस पदाधिकारियों से उनके पारिवारिक समीकरणों ने उन्हें कई मुश्किल दौर में सहारा देने का काम किया।
लगातार विवादों, साहसिक फैसलों, राजनीतिक दबावों और अदालतों की लड़ाइयों के बावजूद पंकज चौधरी एक ऐसे आईपीएस अधिकारी के रूप में उभरे हैं जो अपनी बेबाकी और जोखिम भरे कदमों के लिए जाने जाते हैं। उनकी ताज़ा कोर्ट याचिका ने यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी स्तर की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं।






