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दिल्ली ब्लास्ट साजिश से जुड़ी जांच में गुजरात से पकड़े गए संदिग्ध डॉक्टर के बारे में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। चीन से MBBS करने और ऑनलाइन फूड बिज़नेस चलाने वाले इस आरोपी की गतिविधियाँ लंबे समय से संदिग्ध बताई जा रही थीं। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह राइसिन जैसे घातक ज़हर का इस्तेमाल कर देश में बड़ा हमला करने की तैयारी में था।

गुजरात ATS की कार्रवाई में पकड़ा गया डॉक्टर अहमद मोइयुद्दीन सैयद अब देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ा खुलासा बनकर सामने आया है। चीन से MBBS की डिग्री हासिल करने के बाद भी उसने कभी किसी अस्पताल में प्रैक्टिस नहीं की और न ही मेडिकल करियर में आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बजाय वह अपने परिवार से अलग एक फ्लैट में रहकर गुप्त गतिविधियों में शामिल था। यहां वह लगातार अज्ञात केमिकल और कच्चा माल मंगवाता था, जिसके बारे में परिवार पूछता तो कह देता कि वह एक खास केमिकल बना रहा है जिससे वह बहुत अमीर हो जाएगा।
उसके फ्लैट की तलाशी में ATS को बड़ी मात्रा में संदिग्ध रसायन, लैब जैसा सेटअप और राइसिन तैयार करने के उपकरण मिले। जांच में पता चला कि वह अरंडी के बीजों से राइसिन जैसे अत्यंत घातक जैविक जहर को अलग करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि उसे कई तकनीकी कमियां आ रही थीं और वह न तो जहर को पूरी तरह तैयार कर पाया और न ही यह तय कर सका कि जैविक आतंकी हमले में इसे कैसे फैलाया जाएगा। फिर भी उसकी तैयारी इतनी खतरनाक थी कि एजेंसियों ने इसे बम धमाके से भी बड़ा खतरा बताया।
डॉक्टर सैयद की गतिविधियाँ केवल उसके अकेले रहने या केमिकल मंगाने तक सीमित नहीं थीं। जांच में यह भी सामने आया कि उसकी ऑनलाइन गतिविधियां ISKP जैसे आतंकी संगठन से जुड़े मॉड्यूल तक पहुंचती थीं। उसका संपर्क ‘खदीजा’ नाम की महिला से था, जिसके तार सीधे इस्लामिक स्टेट खोरासन प्रांत से जुड़े थे। इसी नेटवर्क की मदद से वह भारत में राइसिन फैलाने की साजिश रच रहा था।
उसका प्रोफ़ाइल भी काफी रहस्यमय रहा—न शादी, न किसी सामाजिक संपर्क, छह भाई-बहनों में सबसे छोटा, और एकांत में रहने की आदत। वह ऑनलाइन फूड बिजनेस में पार्टनर जरूर था, लेकिन वास्तविकता यह थी कि वह उसी पैसे और नेटवर्क का इस्तेमाल अपने खतरनाक प्रयोगों के लिए कर रहा था। इस मॉड्यूल के अन्य सदस्यों को यूपी से गिरफ्तार किया गया, जिससे पता चला कि यह साजिश काफी गहरी और विस्तृत थी।
कुल मिलाकर, डॉक्टर सैयद का मामला यह दर्शाता है कि कैसे एक शिक्षित व्यक्ति भी आतंकवादी संगठनों के प्रभाव में आकर देश में बड़े पैमाने पर जैविक हमला करने की तैयारी कर सकता है। Gujarat ATS की समय रहते की गई कार्रवाई ने एक संभावित विनाशकारी हमले को टाल दिया।






