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बिहार की विधानसभा चुनावी गहमागहमी के बीच, मोकामा विधानसभा क्षेत्र में अब तक शांतिपूर्ण माना गया राजनीतिक माहौल अचानक तनावपूर्ण मोड़ पर पहुँच गया है। इस सीट पर पाँच-बार के विधायक और जनता दल (यू) (JD(U)) के प्रत्याशी अनंत सिंह का मुकाबला है वीणा देवी से, जो पूर्व विधायक सूरजभान सिंह की पत्नी हैं।
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इस राजनीतिक मुकाबले की पृष्ठभूमि में एक भयावह घटना घटी: प्रचार के दौरान दो समर्थक समूहों के बीच झड़प हुई, जिसमें पूर्व राजद नेता और प्रचारक दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। मृतक ‘जन सुराज’ पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे। पुलिस के बयान के अनुसार, इस कत्ल में अनंत सिंह की मौजूदगी थी, और उन्हें तथा उनके साथियों को गिरफ्तार किया गया है
इसके बाद मतदाताओं में एक अस्वाभाविक “खामोशी” छा गई है — मतलब यह है कि जहाँ पहले तरह-तरह की चर्चाएँ, समर्थन-विरोध, तैयारियाँ सुनने को मिलती थीं, अब मैदान में सूनापन है और लोग चुप्पी साधे हुए हैं। इस खामोशी के पीछे कई कारण दिख रहे हैं:
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हिंसा और भय का वातावरण — मोकामा क्षेत्र एक समय से बाहुबली-राजनीति की पैदाइश रहा है, और इस हत्या ने पुराने दबदबे, मुठभेड़, जातीय-सामुदायिक तनाव को फिर से हवा दी है।
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आपराधिक छवि और प्रत्याशियों की विवादित पृष्ठभूमि — दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी ही शक्तिशाली और विवादित व्यक्तित्व हैं, जिसने मतदाताओं में “क्या होगा बाद में” का डर उत्पन्न किया है।
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प्रशासन-सुरक्षा का असर — घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है, भर्ती-स्थानान्तरण किये गए अधिकारी, वाहन जब्त हुये तथा निर्वाचन आयोग की सतर्कता बढ़ी है। इससे चुनावी माहौल अधिक संवेदनशील दिखने लगा है।
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मतदाताओं की असमंजस की स्थिति — जहाँ एक ओर वे शांत और सुरक्षित मतदान के पक्ष में हैं, वहीं हत्या जैसे घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि परिणाम के बाद क्या हाल होगा, किसकी सुरक्षा होगी, किसका दबदबा बनेगा। इस अनिश्चितता ने उन्हें चुप रहने को प्रेरित किया है।
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जातीय-सामुदायिक समीकरणों में बदलाव — मृतक का यदुवादी-धनुक समुदाय से संबंध होने और प्रत्याशी-समर्थक समूहों की समीकरण बदलने का संकेत मिलने से विभिन्न समूहों में असमर्थन या झिझक का भाव बढ़ा है।
इस सब मिलकर मोकामा के मतदाताओं के लिए यह स्थान एक नए-पुराने चुनौती के रूप में उभर गया है — जहाँ वे मतदान करना चाहते हैं, लेकिन साथ ही यह चिंता भी है कि उनके मतदान के बाद क्या स्थिति रहेगी? क्या हताशा, हिंसा या दबदबा बढ़ेगा? इस डर ने उन्हें सुनसान कर दिया है।






