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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमने पहलगाम हमले का पूरी तैयारी से जवाब दिया। हम सबके लिए मित्रता रखेंगे, लेकिन सुरक्षा के लिए सतर्क रहना होगा।
RSS प्रमुख ने यह बात गुरुवार को नागपुर में विजयादशमी पर संगठन के शताब्दी समारोह में कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में कोई अकेले जीवन जी नहीं सकता है। वैश्विक सहयोग और समन्वय जरूरी है।
इससे पहले भागवत ने सबसे पहले RSS के संस्थापक डॉ हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी।
मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद ने भी नमन किया।
इसके बाद मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। थोड़ी देर में भागवत संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम नागपुर के रेशम बाग मैदान में आयोजित किया जा रहा है।
इसमें 21000 स्वयंसेवकों ने भाग लिया विजय दशमी उत्सव संघ की देशभर की 83 हजार से अधिक शाखाओं में भी मनाया जा रहा है। संघ विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। 1925 में विजयादशमी के दिन थी।


घाना, इंडोनेशिया से भी मेहमान शामिल हुए विजयादशमी उत्सव में लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलित, दक्षिण भारत की कंपनी डेक्कन समूह से केवी कार्तिक और बजाज समूह से संजीव बजाज को भी आमंत्रित किया गया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने इस उत्सव में विदेशी मेहमानों को भी आमंत्रित किया है। इसमें घाना, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, यूके, यूएसए शामिल हैं।
RSS प्रमुख बोले- आज हमारी विविधताओं को खत्म करने की कोशिश की जा रही
आरएसएस प्रमुख ने कहा, शाखा से स्वंयसेवकों में राष्ट्र के प्रति भक्ति का निर्माण होता है। किसी भी देश को ऐसा होना हो तो समाज में एकता चाहिए। हमारा देश विविधताओं का देश है। बीच के काल में आक्रमण हुए विदेश भारत आ गए। यहां के लोगों ने उनके पंत को स्वीकार किया,अंग्रेज चले गए लेकिन कुछ परंपराएं यहां रह गईं। अब हम उन परंपराओं का सम्मान कर रहे हैं। हम उन्हें पराया नहीं मानते। हम दुनिया की सभी परंपराओं का स्वागत करते हैं। आज अपने देश में इन विविधताओं को भेद में बदलने की कोशिश चल रही है। सब अपनी जगह ठीक हैं हम एक ही हैं हम अलग नहीं है। एकता के चलते हमारा सबका आपस का व्यवहार सम्मानपूर्वक होना चाहिए। सब के अपने पूजा स्थान हैं। उनका सम्मान होना चाहिए। यहां सब साथ रहते हैं, जैसे बर्तन साथ रहते हैं, तो आवाज हो जाती है। समाज में इतने लोग हैं अगर छोटी बातों पर कुछ हो जाता है, सड़क पर निकल आए, तो यह ठीक नहीं है। शासन प्रशासन अपना काम बिना पक्षपात के करते हैं, लेकिन समाज की युवा पीढ़ी को सजग होना पड़ेगा, क्योंकि ये अराजकता का व्याकरण है, इसे रोकना पड़ेगा। हमारा एकता का आधार हमारी विविधिता है। भारत की विशेषता है वो सर्व समाजसेवक है।
मोहन भागवत ने कहा- जैसा आपको देश चाहिए वैसा आपको होना पड़ेगा
मोहन भागवत ने कहा, भाषण देने वालों को भी अपने जीवन में बदलाव लाना होगा। उन्हें उदाहरण देना पड़ेगा। जो समाज को अपना मानकर चलते हैं, वैसा नेतृत्व चाहिए। संघ का अनुभव है कि व्यक्ति निर्माण से समाज परिवर्तन और समाज परिवर्तन से व्यवस्था परिवर्तन होता है। उन्होंने कहा कि सब जगह ऐसा ही होता है। हर एक राष्ट्र में समाज का अपना तरीका था सब जगह खत्म हो गया लेकिन भारत में यह अभी भी चल रहा है। समाज के क्रियाकलापों से मुनष्य का निर्माण होता है।
भागवत ने कहा, आदत बदले बिना बदलाव नहीं आता। जैसा आपको देश चाहिए वैसा आपको होना पड़ेगा। संघ की शाखा ये आदत बदलने का तरीका है। 100 सालों में सबकुछ देखा संघ को राजनीति में आने का न्योता मिला लेकिन उसने नहीं किया। स्वयंसेवकों ने शाखा को हमेशा चलाया है। आदत बननी चाहिए, लेकिन छूटनी नहीं चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा- दुनिया भारत की ओर देखती है
मोहन भागवत ने कहा, दुनिया में बेचैनी है, उथल-पुथल है, इसके बीच दुनिया भारत से अपेक्षा कर रही है। नियति भी यही चाहती है कि भारत कोई हल निकालेगा। भारत उन्हें मार्गदर्शन देगा।
पहली बात है कि दुनिया की व्यवस्था में परिवर्तन तो चाहिए, लेकिन सभी आगे चल रहे हैं। एकदम पीछे मुड़ेंगे तो गाड़ी पलट जाएगी, इसलिए धीरे-धीरे कदमों से पीछे पलटना होगा। तब इस व्यवस्था का सही से काम होगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया को धर्म की दृष्टि देनी होगी। यह सबको चलने वाला उन्नति वाला मार्ग दुनिया को देना होगा। ऐसा संघ भी मानता है। जैसा समाज है वैसी व्यवस्था चलेगी। इसलिए समाज को बदलना होगा ताकि सिस्टम बदल सके। समाज को नए आचरण में ढालना होता है।
मोहन भागवत बोले- बाहर की ताकतों को खेल खेलना का मौका मिलेगा
मोहन भागवत ने कहा- प्राकृतिक उथल-पुथल के बाद पड़ोसी देशों में भी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कभी-कभी होता है प्रशासन जनता को ध्यान में रखकर नीति नहीं बनाता, उनमें असंतोष होता है लेकिन उसका इस तरह से सामने आना वह ठीक नहीं है। इतनी हिंसा सही नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव आता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे ही हिंसक परिवर्तनों से उद्देश्य नहीं मिलता बल्कि अराजकता की स्थिति में बाहर की ताकतों को खेल खेलना का मौका मिल जाता है। पड़ोसी देशों में ऐसा होना हमारे लिए चिंता का विषय है, क्योंकि वे पहले हमारे लोग ही थे। परिस्थिति ऐसी हैं कि सुख सुविधा बढ़ी, राष्ट्र पास आए,आर्थिक लेने देन के जरिए पास आए। मनुष्य जीवन में जंग और कलह चल रहे हैं अब परिवारों में भी टूटन आ रही है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा,आज आप अकेले नहीं जी सकते
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अमेरिका ने जो नई टैरिफ नीति अपनाई उसकी मार सभी पर पड़ रही है। इसलिए दुनिया में आपसी संबंध बनाने पड़ते हैं। आप अकेले नहीं जी सकते लेकिन ये निर्भरता मजबूरी में न बदल जाए। इसलिए हमको इसको मजबूरी न बनाते हुए जीना बनाते हुए आत्मनिर्भर होना पड़ेगा।
RSS प्रमुख ने कहा- हमें अपनी सुरक्षा के लिए सजग रहना होगा

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सादगी विनम्रता के प्रतीक, जिन्होंने देश के लिए प्राण दिए ऐसे ही एक लाल बहादुर शास्ती की भी जयंती है। परिस्थिति एक जैसी नहीं होती, अनेक रंगो जैसी होती है। हमारी आशाएं और विश्वास को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि पहलगाम दुर्घटना हुई, धर्म पूछकर उनकी हत्या की गई। उसके चलते पूरे देश में क्रोध और दुख था। सेना और सरकार ने पूरी तैयारी से जवाब दिया। सारे प्रकरण में हमारे नेतृत्व की दृढता का चित्र प्रकाशित हुआ। यदि हम सबके प्रति मित्रता रखेंगे लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए सजग रहना होगा।
RSS प्रमुख ने कहा-आजादी महात्मा गांधी का भी प्रमुख योगदान
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा,”यह साल श्रीगुरुतेग बहादुकर के बलिदान का 350वां वर्ष है। हिंद की चादर बनकर जिन्होंने अन्याय से समाज की मुक्ति के लिए अपना बलिदान दिया। ऐसे विभूति का स्मरण इस साल होगा।” उन्होंने कहा,”आज गांधी जी की भी जयंती है। उनका योगदान अविस्मरणीय है। आजादी के बाद भारत का तंत्र कैसा चले उसके बारे में विचार देने वालों में उनका नाम था।”
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “आज का विजयादशमी उत्सव आरएसएस की शताब्दी का प्रतीक है। नागपुर की पावन भूमि आधुनिक भारत की कुछ महान विभूतियों की स्मृतियों से जुड़ी है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. भीमराव अंबेडकर भी उनमें शामिल हैं।”






