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भिवानी माकपा जिला कमेटी ने बाढ़ और बारिश से प्रभावित लोगों के लिए उचित सहायता राशि की घोषणा न करने और सहायता देने में देरी करने की कड़ी आलोचना की है। माकपा जिला सचिव कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण लोगों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि इस साल मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश होने की पूर्व सूचनाएं विशेषज्ञों द्वारा दी गई थीं, जो सही साबित हुईं। प्रदेश में सामान्य से 48 फीसद अधिक बारिश हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा समय रहते ड्रेनों, नालों और नहरों की सफाई के पुख्ता प्रबंध न करने और भारी बारिश की पूर्व चेतावनी को नजरअंदाज करने के कारण लोगों को भारी नुकसान हुआ है।
कामरेड ओमप्रकाश ने इसे आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा कि राज्य सरकार इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है। उन्होंने सरकार से तत्काल बाढ़ पीड़ितों के लिए उचित सहायता राशि की घोषणा करने और उन्हें जल्द से जल्द राहत पहुंचाने की मांग की है

हजारों घरों में हुआ नुकसान कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि एक तो नव उदारीकरण की नीतियों के चलते कृषि पहले ही संकट की चपेट में है, दूसरा जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों की फसलों को सूखा पड़ने, अधिक बरसात होने व बढ़ती बीमारियों की वजह से भारी नुकसान हो रहा है। अकेले भाजपा शासन के दौरान ही 4 लाख किसान व खेत मजदूर बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हुए हैं।
भाजपा सरकार की कृषि क्षेत्र के प्रति संवेदनहीनता किसी से छुपी हुई नहीं है। बार-बार किसान आंदोलनों का होना इस बात की पुष्टि करता है। बहरहाल बाढ़ व बारिश से जिले में भयानक तबाही हुई है, राज्य में 27 लोगों की जान चली गई है और हजारों घरों को नुकसान पहुंचा है तथा जरुरी सामान नष्ट हो गया है।
5.03 लाख किसानों ने खराब फसल की दी सूचना कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वार खोले गए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया के तहत अंतिम तारीख 15 सितंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में बाढ़ व बारिश से हुए नुकसान का 5.03 लाख किसानों ने 29 लाख 46 हजार 259 एकड़ जमीन में फसल खराब होने की सूचना दी है। अकेले भिवानी जिले में यह नुकसान 272 गांव में 79589 किसानों का 471591 एकड़ जमीन में नुकसान दर्ज हुआ है। यह तब है जब क्षति पूर्ति पोर्टल की बार-बार बंद होने की शिकायतें भी उठती रही हैं।
प्रदेश सरकार ने प्रभावित लोगों को आर्थिक सहयोग देने के लिए बहुत कम राशि का प्रावधान किया है। प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ मात्र 7 हजार रुपए देने की घोषणा की है, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब ने किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार रुपए देने की घोषणा की। यह किसानों के प्रति भाजपा की मानसिकता का जीता जागता उदाहरण सामने आया है।






