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लेखराज कौशल (संवाददाता)
हापुड़/समाजवादी पार्टी जिला कार्यालय बुलंदशहर रोड पर आज जिला अध्यक्ष आनन्द गुर्जर की अध्यक्षता में जिला कार्यालय पर ,श्री कर्पूरी ठाकुर, जी की जयंती मनाई गई की जयंती के अवसर पर सभी कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखें और उनके जीवन पर प्रकाश डाला गया।

कर्पूरी जी बिहार में एक सामाजिक आंदोलन के प्रतीक रहे हैं, इसलिए हर तरह के लोग, विभिन्न राजनीतिक दल उनके जन्मदिन पर सामाजिक न्याय के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेते रहे हैं, हां अब दावे प्रतिदावे ज़रूर बढ़ गए हैं.”
दरअसल, मंडल कमीशन लागू होने से पहले कर्पूरी ठाकुर बिहार की राजनीति में वहां तक पहुंचे जहां उनके जैसी पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति के लिए पहुँचना लगभग असंभव ही था. वे बिहार की राजनीति में ग़रीब गुरबों की सबसे बड़ी आवाज़ बन कर उभरे थे।

24 जनवरी, 1924 को समस्तीपुर के पितौंझिया (अब कर्पूरीग्राम) में जन्में कर्पूरी ठाकुर बिहार में एक बार उपमुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री और दशकों तक विधायक और विरोधी दल के नेता रहे. 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे.
अपने दो कार्यकाल में कुल मिलाकर ढाई साल के मुख्यमंत्रीत्व काल में उन्होंने जिस तरह की छाप बिहार के समाज पर छोड़ी है, वैसा दूसरा उदाहरण नहीं दिखता. ख़ास बात ये भी है कि वे बिहार के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे.इस अवसर पर डॉ राजेश यादव, अख्तर मालिक, साकिर हुसैन, हेमंत गुप्ता,अयूब सिद्दीकी, रिजवान प्रधान जी, आजाद अल्वी, जयवीर सिंह, चौ हम्माद मतीन, आदि लोग उपस्थित रहे।






