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दिल्ली में नाबालिगों के अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ड्रग्स की लत, सोशल मीडिया की दिखावे वाली दुनिया और गैंगों का प्रभाव कम उम्र के बच्चों को हिंसा और हथियारों की ओर धकेल रहा है। कमजोर पारिवारिक माहौल और निगरानी की कमी भी इस समस्या को और बढ़ा रही है।
साल 2025 के आखिरी महीने को बमुश्किल 10 ही दिन बीते हैं और देश की राजधानी दिल्ली में चार जघन्य अपराधों में 13 नाबालिग गिरफ्तार हो चुके हैं। रोहिणी में जहां 2 स्कूली बच्चों ने अपने ही साथी के साथ गंदा काम किया तो शकरपुर और वजीराबाद में 2 मर्डर में नाबालिग ही धरे गए। निजामुद्दीन में कैब ड्राइवर की हत्या में भी नाबालिग ही आरोपी हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस साल जनवरी से अगस्त के बीच 101 हत्याओं में नाबालिग ही आरोपी हैं। यही नहीं 92 रेप, 157 लूटपाट और 161 हत्या के प्रयास में नाबालिगों पर ही केस दर्ज है। चोरी और सेंधमारी के 460 से ज्यादा मामलों में भी इन्हीं का हाथ बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस बड़े पैमाने पर नाबालिगों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों दिल्ली में 18 की उम्र से पहले ही युवा जुर्म के रास्ते पर चलने लगे हैं?
दिल्ली में क्यों नाबालिग थाम रहे हथियार
दिल्ली में अपराध की दुनिया में शुरू हुए इस नए ट्रेंड के पीछे बहुत सी चीजें सामने आ रही हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बीच में ही स्कूल छोड़ देना, घरवालों का निगरानी ठीक से न रखना, घ्ज्ञर पर मुश्किल हालात में बचपन बीतना, सोशल मीडिया पर झूठी चमक और लोकप्रियता हासिल करना कुछ अहम कारण साबित हो रहे हैं।
ड्रग्स के आदी बन रहे युवा
दिल्ली में नाबालिगों के अपराध में शामिल होने का एक बड़ा कारण युवाओं का नशे का आदी होना भी है। युवाओं को कम उम्र में ही ड्रग्स की लत लगने लगी है और नशे में वे अपराध को अंजाम दे रहे हैं। एक सीनियर पुलिस अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में एक्टिव गैंग इसका फायदा उठा रहे हैं। ये गैंग पैसों और ड्रग्स का लालच देकर नाबालिगों को अपराध की गंदी दुनिया में धकेल रहे हैं। जो युवा मोटरसाइकिल चलाना जानते हैं, उन्हें खासतौर से टारगेट किया जा रहा है। गैंगस्टर्स को अच्छे से पता है कि इन युवाओं के घर पर हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में थोड़े से पैसों में काम हो जाता है। इसके अलावा उन्हें यह भी बखूबी पता है कि नाबालिगों को वयस्क की तुलना में कम सजा होती है।
सोशल मीडिया कर रहा आग में घी का काम
पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। युवा कम उम्र में ही अपने मोहल्ले में फेमस होना चाहते हैं। वे हथियारों के साथ फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना भौकाल बनाना चाहते हैं। इसी कोशिश में उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब अपराध की दुनिया में फंस जाते हैं।
संयुक्त परिवार की संस्कृति खत्म होना भी बड़ी समस्या
सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर मनोवैज्ञानिक डॉक्टर राजीव मेहता इस ट्रेंड के पीछे संयुक्त परिवार की परंपरा खत्म होने को भी एक वजह मानते हैं। वह कहते हैं, ‘एक बच्चे की पर्सनेलिटी डेवलप करने में संयुक्त परिवार की बड़ी भूमिका होती थी। पहले बच्चे भरे-पूरे परिवार में बड़े होते थे। बाहर अपने भाई-बहनों के साथ खेलते थे। साथ मिलकर नई चीजें सीखते थे। घर के बड़े मिलकर पालन-पोषण करते थे। ऐसे में बच्चों के भटकने की आशंका बहुत ही कम होती थी।’ वह आगे कहते हैं, ‘समय के साथ अब यह खत्म होता जा रहा है। अब बच्चों को कुछ ज्यादा ही प्यार-दुलार दिया जाता है। उनकी मांगों को तुरंत मान लिया जाता है। ऐसे में अगर कुछ बच्चों की मांग पूरी नहीं होती है तो वे अपराध का रास्ता अपना लेते हैं।’
अश्लील कंटेंट से भी युवाओं के दिमाग में भर रही गंदगी
सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट भरा पड़ा है। किशोरावस्था में लड़के-लड़कियां एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं, जो कि बहुत ही आम है। लेकिन सोशल मीडिया उनके दिमाग में एक अलग ही छवि गढ़ने लगता है। उन्हें लगता है कि सब कुछ पाना बहुत ही आसान है। दोस्तों में खुद को ‘बेहतर’ साबित करने का दबाव भी बड़ा फैक्टर है। इस वजह से भी युवा भटक जा रहे हैं।






