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सुप्रीम कोर्ट में तलाक का एक बेहद दुर्लभ मामला सामने आया, जहाँ पत्नी ने किसी भी तरह की एलिमनी लेने से साफ इनकार कर दिया और सास से मिले कंगन भी स्वेच्छा से वापस कर दिए।
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सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा अनोखा और दुर्लभ तलाक मामला सामने आया जिसने अदालत को भी प्रभावित किया। इस मामले में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे तनावपूर्ण वैवाहिक संबंधों को समाप्त करने की प्रक्रिया के दौरान पत्नी ने ऐसा कदम उठाया, जो आमतौर पर तलाक के मामलों में बहुत कम देखने को मिलता है। महिला ने न सिर्फ भरण-पोषण (एलिमनी) या किसी भी प्रकार के आर्थिक मुआवजे की मांग से पूरी तरह इनकार कर दिया बल्कि विवाह के समय पति की मां द्वारा दिए गए सोने के कंगन भी स्वयं वापस कर दिए।
सुनवाई की शुरुआत में ही महिला के वकील ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मुवक्किल किसी भी प्रकार की आर्थिक मांग नहीं कर रही है। जब अदालत को बताया गया कि केवल कंगन वापस करने का मुद्दा बाकी है, तो पहले ऐसा समझा गया कि पत्नी अपना स्त्रीधन मांग रही है। लेकिन तुरंत ही यह स्पष्ट कर दिया गया कि मामला उलट है—महिला ही वे कंगन लौटाना चाहती है, जो उसे विवाह समारोह के दौरान मिले थे।
जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली पीठ ने इस कदम की विशेष सराहना की। उन्होंने टिप्पणी की कि यह उन अत्यंत दुर्लभ मामलों में से एक है जहाँ तलाक की प्रक्रिया के दौरान कोई आर्थिक लेन-देन नहीं हुआ और उल्टे पत्नी ने स्वयं कीमती गहने भी वापस कर दिए। अदालत ने माना कि आजकल ऐसे उदाहरण बेहद कम देखने को मिलते हैं और महिला के इस उदार रवैये को सराहनीय बताया।
अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए दोनों पक्षों के बीच विवाह को औपचारिक रूप से भंग कर दिया। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच चल रही अन्य कोई भी लंबित कार्यवाही, यदि हो, वह भी समाप्त मानी जाए। जस्टिस पारदीवाला ने महिला को सलाह दी कि वह बीती बातों को पीछे छोड़कर जीवन में आगे बढ़ें और खुशहाल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।






