स्कूल जाने से मना करने वाले बच्चे की जिद पर दादा-दादी ने किया साथ, मां हुई दुखी”


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“दादा-दादी द्वारा बच्चों को ओवर-पैम्पर करना कभी-कभी भारी पड़ सकता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक बच्चा पिछले एक महीने से स्कूल नहीं जा रहा था। आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी जिद में उसके दादा-दादी भी उसका साथ दे रहे थे, जिससे मां दुखी हो गई। यह घटना बच्चों की मनमानी और ग्रैंडपेरेंट्स के ओवर-इंटरवेंशन की संभावित समस्याओं को उजागर करती है।”

child skips school for a month grandparents take his side expert warns when it s a son the family gives in too quickly

हर दादा-दादी अपने पोती-पोते से बेहद प्‍यार करते हैं, लेकिन कई बार उनका यही प्यार बच्चों को बिगाड़ भी देता है। कई बार तो वे बच्‍चे ज‍िद करना सीख जाते हैं, बात ही नहीं सुनते हैं, क्‍योंक‍ि उन्‍हें लगता है क‍ि ग्रैंड पेरेंट्स तो उनकी बात सुन ही लेंगे। वहीं, इसी वजह से अक्सर कई पेरेंट्स शिकायत करते हैं कि उनका बच्चा दादा-दादी की वजह से मनमानी करने लगता है या फिर उनकी कोई बात नहीं मानता। ऐसी स्थिति में उन्हें समझ नहीं आता कि इसे कैसे संभालें। कई बार तो इस वजह से पेरेंट्स काफी परेशान हो जाती हैं।

वहीं, कुछ ऐसा ही एक परेशानी झेल रही एक मां ने भी पीडियाट्रिशन डॉक्टर पवन मंदाविया से अपनी दिल की बात साझा की। मां ने बताया कि उनका बेटा पिछले एक महीने से स्कूल जाने से इंकार कर रहा है। जब भी वह उसे स्कूल भेजने के लिए कहती हैं, दादा-दादी तुरंत बच्चे का साथ देने लगते हैं। उनकी हर ज‍िद को सही ठहराते हैं। इस वजह से बच्चा और भी ज्‍यादा जिद्दी होता जा रहा है। डॉक्टर ने पूरी बात ध्यान से सुनने के बाद क्‍या कहा और मह‍िला ने और क्‍या समस्‍या बताई, चल‍िए जानते हैं सब व‍िस्‍तार से।

बच्‍चा 1 महीने से नहीं जा रहा था स्‍कूल

बच्‍चा 1 महीने से नहीं जा रहा था स्‍कूल

इंस्‍टाग्राम वीडियो में पीडियाट्र‍िशयन डॉ. पवन मंदाविया बताते हैं कि हाल ही में एक मां 10 साल के बच्चे को लेकर ओपीडी में आईं। वह बेहद परेशान थीं, क्योंकि उनका बच्चा पिछले एक महीने से स्कूल जाने से इंकार कर रहा था।

दादा-दादी ने द‍िया साथ

दादा-दादी ने द‍िया साथ

एक्सपर्ट आगे बताते हैं कि जब मां ने बच्चे को जबरदस्ती स्कूल भेजने की कोशिश भी की, तो उसके दादा–दादी ने रोक दिया और कहा कि अगर बच्चा स्कूल नहीं जाना चाहता, तो उसे मत भेजो। बस इसी कारण वह बच्चा पिछले एक महीने से घर पर ही बैठा था।

बेटे को देख बेटी ने भी स्‍कूल जाने से क‍िया मना

बेटे को देख बेटी ने भी स्‍कूल जाने से क‍िया मना

डॉक्टर आगे बताते हैं कि यह बच्चा महिला की जेठानी का बेटा था। अब उसे देखकर महिला की अपनी चार साल की बेटी भी स्कूल जाने से मना करने लगी। इसी वजह से मां बेहद परेशान और दुखी थी।

दादा-दादी बच्‍चे को द‍िला देते हैं 10 हजार की कार

दादा-दादी बच्‍चे को द‍िला देते हैं 10 हजार की कार

चाइल्ड स्पेशलिस्ट बताते हैं कि मां ने आगे कहा कि उनका परिवार मिडिल क्लास है, लेकिन फिर भी बच्चे के लिए हर महीने दो–तीन हजार रुपए के खिलौने आते थे। बच्चा अगर जरा भी ट्रैंटम द‍िखाता है, तो दादा-दादी उसकी हर जि‍द पूरी कर देते थे। यहां तक कि एक बार उसने जिद की, तो ग्रैंडपेरेंट्स ने उसे 10 हजार रुपए की कार तक दिला दी।

ग्रैंड-पेरेंट्स समझाने पर नहीं समझते

ग्रैंड-पेरेंट्स समझाने पर नहीं समझते

डॉ. मंदाविया बताते हैं ‘जब घर की दोनों बहुओं ने जब इस बात विरोध किया, तो दादा-दादी ने उनकी बात सुनते ही नहीं थे। उनके पति बाहर रहते थे, इसलिए वो भी कुछ ज्‍यादा इस मामले में मदद नहीं कर पाते थे। सारी परेशानी बताकर जब मां रोने लगीं, तो उनका बच्चा उल्टा उन पर हंस रहा था। यह देखकर मुझे भी गुस्सा आया। लेकिन फिर एहसास हुआ कि गलती बच्चे की नहीं, बल्कि हमारे समाज में जॉइंट फैमिली में होने वाले प्रॉब्‍लम की है।’

घर का च‍िराग हो तो हर ज‍िद पूरी

घर का च‍िराग हो तो हर ज‍िद पूरी

पीडियाट्रिशन आगे बताते हैं कि अक्सर देखा जाता है, जब भी मां किसी गलत चीज के लिए बच्चे को रोकती या मना करती है, तो दादा-दादी तुरंत बीच में आकर बच्चे का पक्ष ले लेते हैं और उसकी हर ज‍िद पूरी कर देते हैं। यह स्थिति खासतौर पर तब ज्‍यादा देखने को मिलती है, जब बच्चा लड़का हो या घर का ‘चिराग’ माना जाता हो। यही हमारे भारतीय समाज की जॉइंट फैमिली की कड़वी सच्चाई है।

बच्‍चे को अनुशासि‍त स‍िर्फ मां अकेले नहीं रख सकती

बच्‍चे को अनुशासि‍त स‍िर्फ मां अकेले नहीं रख सकती

डॉक्टर समझाते हैं कि बच्चे को अनुशासित रखना मां अकेले नहीं कर सकती है, इसमें पूरे परिवार की भागीदारी जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चा रोए तो दादा-दादी तुरंत चॉकलेट दे देते हैं, और अगर वह चिल्लाए तो नाना-नानी रिमोट थमा देते हैं। ऐसे में जब मां उसे रोकती है, तो वही गलत दिखने लगती है और उसे ओवर-स्ट्रिक्ट कहा जाता है।

यहां देखें पूरा वीड‍ियो

प‍िता आगे आकर न‍िभाएं अपनी भूम‍िका

प‍िता आगे आकर न‍िभाएं अपनी भूम‍िका

चाइल्ड स्पेशलिस्ट कहते हैं कि ऐसी स्थिति में किसी को दोष देना नहीं, बल्कि एक बैलेंस बनाना है। यह संतुलन बनाने में पिता अहम भूमिका निभा सकते हैं। पिता को आगे आकर स्पष्ट करना होगा कि अनुशासन माता-पिता तय करेंगे और दादा-दादी उसका समर्थन देंगे। बच्चे के लिए प्यार जरूरी है, लेकिन अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

ड‍िस्‍केलमर इस लेख में दी गई सूचना पूरी तरह इंस्‍टाग्राम रील पर आधार‍ित है। एनबीटी इसकी सत्‍यता और सटीकता की ज‍िम्‍मेदारी नहीं लेता है।

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