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“मयंक की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो नौकरी के साथ UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी का सपना देखते हैं। दिनभर की थकाने वाली ड्यूटी के बावजूद मयंक ने अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उन्होंने रात के शांत समय को अपनी ताकत बनाया और निरंतर मेहनत के साथ तैयारी जारी रखी। सीमित समय, लगातार दबाव और संघर्षों के बीच भी उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नज़रअंदाज़ नहीं होने दिया। आखिरकार उनकी दृढ़ता और अनुशासन ने उन्हें UPSC टॉपर बना दिया। मयंक की सफलता साबित करती है कि सही दिशा, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।
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“मयंक त्रिपाठी की सफलता की कहानी दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन की मिसाल है। दिन में नौकरी की जिम्मेदारियों को निभाते हुए और रात में लगातार पढ़ाई करते हुए उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी की। संघर्षों और सीमित समय के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य—IAS बनने—को कभी कमजोर नहीं होने दिया। मयंक ने न सिर्फ एक बार बल्कि दो बार UPSC परीक्षा पास की और अंततः ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल कर अपने सपने को सच कर दिखाया। उनकी यह यात्रा देशभर के उम्मीदवारों को प्रेरणा देती है कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और धैर्य के साथ कोई भी बाधा सफलता के रास्ते को रोक नहीं सकती।”
शुरुआती पढ़ाई के बाद हिंदू कॉलेज से इंजीनियरिंग
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“कानपुर के रहने वाले मयंक त्रिपाठी की शुरुआती पढ़ाई उनके गृह नगर में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वह दिल्ली आए और प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग पूरी करने के बावजूद उनका असली लक्ष्य सिविल सर्विस में जाना था, और इसी सपने ने उन्हें UPSC की ओर प्रेरित किया।”






