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“पीयूष मिश्रा ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि चमक-धमक के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिपा है, जिसे आम लोग नहीं देख पाते। उनके मुताबिक इंडस्ट्री में नकलीपन, निर्दयता और दिखावे का माहौल हावी रहता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वहां शराब, गांजा और नशे जैसी चीज़ें आम हैं, जो कई कलाकारों को गलत दिशा में ले जाती हैं। उनके इन बयानों ने इंडस्ट्री की वास्तविकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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“फिल्म इंडस्ट्री के चमकते पर्दे के पीछे छिपे कड़वे सच पर एक्टर, राइटर और लिरिसिस्ट पीयूष मिश्रा ने खुलकर बातचीत की और ऐसी बातों का खुलासा किया, जिसने एक बार फिर ग्लैमर वर्ल्ड की वास्तविकता पर बहस छेड़ दी है। ‘आज तक’ के एक कार्यक्रम में मिश्रा ने इंडस्ट्री को ‘नकली’, ‘निर्दयी’ और ‘निष्ठुर’ करार देते हुए कहा कि यहाँ दिखावा हावी है, जबकि सच्चाई और भावनाओं की कोई कीमत नहीं। उन्होंने बताया कि भले ही इंडस्ट्री ने उन्हें बहुत कुछ दिया हो, लेकिन इसके बावजूद वे इस माहौल को बनावटी और झूठा मानते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि वह शूटिंग खत्म होते ही सीधा घर लौट जाते हैं—न पार्टी, न मेल-जोल—क्योंकि इंडस्ट्री की सामाजिक संस्कृति उन्हें बिल्कुल नहीं भाती।
दोस्तियों के सवाल पर मिश्रा ने साफ कहा कि उनके फिल्म इंडस्ट्री में कोई दोस्त नहीं हैं। अनुराग कश्यप, विशाल भारद्वाज और इम्तियाज अली जैसे लोग, जिनके साथ उन्होंने काम किया, वे भी उनके अनुसार मुख्यधारा इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं बल्कि अपने खुद के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। उनके मुताबिक, दोस्ती की जगह यहाँ हर चीज़ ‘गिव एंड टेक’ पर आधारित है, जिससे घुलना-मिलना और भी मुश्किल हो जाता है।
स्टारडम और काम के बारे में बात करते हुए उन्होंने माना कि वे खुद कभी स्टार नहीं रहे, क्योंकि स्टार वही होता है जिस पर प्रोड्यूसर खुलकर पैसा लगाए। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी के ‘फेस वैल्यू’ या सोशल पार्टीज़ पर निर्भर नहीं करते—काम सिर्फ काम से मिलता है, न कि पार्टियों में तस्वीर खिंचवाने से। मिश्रा के अनुसार, यह धारणा गलत है कि फिल्मी पार्टियों में जाने से करियर बन जाता है। उन्होंने जोर दिया कि इंडस्ट्री में टिकना सिर्फ प्रतिभा और मेहनत पर आधारित है, वरना यह निर्दयी दुनिया किसी को भी बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं लगाती।
उनके बयानों का सबसे विवादित हिस्सा तब सामने आया जब उन्होंने इंडस्ट्री में मौजूद नशे, गलत आदतों और फिसलन भरे रास्तों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहाँ शराब, गांजा, चरस, लड़कियां और कई आकर्षण ऐसे हैं जो कलाकारों को आसानी से गुमराह कर सकते हैं। उन्होंने इन चीजों को ‘सस्ते और अफोर्डेबल तरीके’ कहा, जिनसे बचकर निकलना और अपने काम पर फोकस बनाए रखना बेहद कठिन है। उन्होंने यह भी कहा कि यहाँ सधकर और ईमानदारी से काम करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि दिखावा और नकलीपन कहीं ज्यादा आम है।
पूरी बातचीत के दौरान मिश्रा बार-बार इस बात पर जोर देते दिखे कि इंडस्ट्री में सच्चाई और अपनी वास्तविक पहचान बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। उनके शब्दों में—‘नकली मत बनो… जैसे हो, वैसे ही रहो, तभी आप टिक पाओगे।’ पीयूष मिश्रा के इन बयानों ने एक बार फिर रौशनी, कैमरा और ग्लैमर की दुनिया के पीछे छिपी कठोर सच्चाइयों को उजागर कर दिया है। उनके विचार कई महत्वाकांक्षी कलाकारों के लिए चेतावनी भी हैं और मार्गदर्शन भी—कि इस दुनिया में सिर्फ प्रतिभा ही आपको आगे ले जा सकती है, बाकी सभी रास्ते सिर्फ भ्रम पैदा करते हैं।”






